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संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

by महर्षि व्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariSanskritpublished318 pages

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अध्याय ५४ ] कल्कि-चरित्र और कलि-धर्म २४३

द्विषन्ति पितरं पुत्रा गुरुं शिष्या द्विषन्ति च। | और वैश्य शूद्रोंके सेवक होंगे। घोर कलिकाल आनेपर पतिं च वनिता द्वेष्टि कलौ घोरे समागते ॥ २४ | पुत्र पितासे, शिष्य गुरुसे और स्त्रियाँ अपने पतियोंसे लोभाभिभूतमनसः सर्वे दुष्कर्मशीलिनः। | द्वेष करेंगी। सबका चित्त लोभसे आक्रान्त होगा, अतएव परान्नलोलुपा नित्यं भविष्यन्ति द्विजातयः ॥ २५ | सभी लोग दुष्कर्मोंमें प्रवृत्त होंगे। ब्राह्मण सदा दूसरोंके परस्त्रीनिरताः सर्वे परद्रव्यपरायणाः। | ही अन्नके लोभी होंगे। सभी परस्त्रीसेवी और परधनका घोरे कलियुगे प्राप्ते नरं धर्मपरायणम् ॥ २६ | अपहरण करनेवाले होंगे। घोर कलियुग आ जानेपर असूयानिरताः सर्वे उपहासं प्रकुर्वते । | दूसरोंमें दोषदृष्टि रखनेवाले सभी लोग धर्मपरायण पुरुषोंका न व्रतानि चरिष्यन्ति ब्राह्मणा वेदनिन्दकाः ॥ २७ | उपहास करेंगे। ब्राह्मणलोग वेदकी निन्दामें प्रवृत्त होकर न यक्ष्यन्ति न होष्यन्ति हेतुवादैर्विकुत्सिताः। | व्रतोंका आचरण नहीं करेंगे। तर्कवादसे कुत्सित विचार द्विजाः कुर्वन्ति दम्भार्थं पितृयज्ञादिकाः क्रियाः ॥ २८ | हो जानेके कारण वे न तो यज्ञ करेंगे और न हवनमें न पात्रेष्वेव दानानि कुर्वन्ति च नरास्तथा। | ही प्रवृत्त होंगे। द्विजलोग दम्भके लिये ही पितृयज्ञ आदि क्षीरोपाधिनिमित्तेन गोषु प्रीतिं प्रकुर्वते ॥ २९ | क्रियाएँ करेंगे। मनुष्य प्रायः सत्पात्रको दान नहीं देंगे। बध्नन्ति च द्विजानेव धनार्थं राजकिंकराः। | लोग दूध आदिके लिये ही गौओंमें प्रेम रखेंगे। राजाके दानयज्ञजपादीनां विक्रीणन्ते फलं द्विजाः ॥ ३० | सिपाही धनके लिये ब्राह्मणोंको ही बाँधेंगे। द्विजलोग प्रतिग्रहं प्रकुर्वन्ति चण्डालादेरपि द्विजाः। | दान, यज्ञ और जप आदिका फल प्रायः बेचा करेंगे। कलेः प्रथमपादेऽपि विनिन्दन्ति हरिं नराः ॥ ३१ | ब्राह्मणलोग चण्डाल आदि अस्पृश्य जातियोंसे भी दान युगान्ते च हरेर्नाम नैव कश्चित् स्मरिष्यति। | लेंगे। कलियुगके प्रथम चरणमें भी लोग भगवान्‌की शूद्रस्त्रीसङ्गनिरता विधवाप्रंगलोलुपाः ॥ ३२ | निन्दा करनेवाले हो जायेंगे॥ २२—३१॥ शूद्रान्नभोगनिरता भविष्यन्ति कलौ द्विजाः। | न च द्विजातिशुश्रूषां न स्वधर्मप्रवर्त्तनम् ॥ ३३ | कलियुगके अन्तिम समयमें तो कोई भगवान्‌के करिष्यन्ति तदा शूद्राः प्रव्रज्यालिङ्गिनोऽधमाः । | नामका स्मरणतक न करेगा। कलियुगके द्विज शूद्रोंकी सुखाय परिवीताश्च जटिला भस्मधूर्धराः ॥ ३४ | स्त्रियोंके साथ सहवास करेंगे और विधवा-संगमके शूद्रा धर्मान् प्रवक्ष्यन्ति कूटबुद्धिविशारदाः । | लिये लालायित रहेंगे तथा वे शूद्रोंका भी अन्न भक्षण एते चान्ये च बहवः पाषण्डा विप्रसत्तमाः ॥ ३५ | करनेवाले होंगे। उस समय अधम शूद्र संन्यासका चिह्न ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्या भविष्यन्ति कलौ युगे । | धारणकर न तो द्विजातियोंकी सेवा करेंगे और न उनकी गीतवाद्यरता विप्रा वेदवादपराङ्मुखाः ॥ ३६ | स्वधर्ममें ही प्रवृत्ति होगी। वे अपने सुखके लिये जनेऊ भविष्यन्ति कलौ प्राप्ते शूद्रमार्गप्रवर्तिनः । | पहनेंगे, जटा रखायेंगे और शरीरमें खाक-भभूत लपेटे अल्पद्रव्या वृथालिङ्गा वृथाहंकारदूषिताः ॥ ३७ | फिरेंगे। विप्रवरो! कूटबुद्धिमें निपुण शूद्रगण धर्मका हर्त्तारो न च दातारो भविष्यन्ति कलौ युगे । | उपदेश करेंगे। ऊपर कहे अनुसार तथा और भी तरहके प्रतिग्रहपरा नित्यं द्विजाः सन्मार्गशीलिनः ॥ ३८ | बहुत-से पाखण्डी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य कलियुगमें आत्मस्तुतिपराः सर्वे परनिन्दापरास्तथा । | उत्पन्न होंगे। कलियुग आनेपर विप्रगण वेदके स्वाध्यायसे विश्वासहीनाः पुरुषा देववेदद्विजातिषु ॥ ३९ | विमुख हो गाने-बजानेमें मन लगायेंगे और शूद्रोंके | मार्गका अनुसरण करेंगे। कलियुगमें लोग थोड़े धनवाले, | झूठा वेष धारण करनेवाले और मिथ्याभिमानसे दूषित | होंगे। वे दूसरोंका धन हरण कर लेंगे, पर अपना | किसीको नहीं देंगे। उस समय अच्छे पथपर चलनेवाले | ब्राह्मण सदा दान लेते फिरेंगे। सभी लोग आत्मप्रशंसक | और दूसरोंकी निन्दा करनेवाले होंगे। देवता, वेद और | ब्राह्मणोंपरसे सबका विश्वास उठ जायगा॥ ३२-३९॥ In Public Domain. Digitzed by Sarvagya Sharda Peeth