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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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10 साहिब बन्दगी

इसके बाद सत्य पुरुष ने सौलह शब्द उचारे जिससे इनके सोलह शब्द पुत्र उत्पन्न हुए। इसके पश्चात् सत्य पुरुष का पांचवां पुत्र निरंजन, जिसको निराकार, निरंजन, नारायण, अथवा मन आदि नामों से जाना जाता है जिसे संसारिक लोग राम, ब्रह्मा, आदि दिरंजन, कादर, क्रीम, प्रमेश्वर, प्रमात्मा, हरी, हरि, अद्वैत, भगवान, तथा अलख निरंजन आदि नामों से याद करते हैं। निरंजन ने 70 युग तक एकागर चित होकर पर्म पुरुष का एक पग पर खड़े होकर ध्यान किया। इस तप से खुश होकर सत्यपुरुष ने निरंजन को मानसरोवर दीप में जाकर रहने को कहा।

इस स्थान पर निरंजन बहुत खुश हुआ और फिर से 70 युग तक एक पग पर खड़े हो कर परम पुरुष का ध्यान किया। परमपुरुष के प्रसन्न होने से निरंजन ने कहा या तो मुझे अमर लोक का राज्य दो नहीं तो अलग से एक न्यारा देश दे दो जिस पर मेरा पूरा अधिकार हो। सत्यपुरुष ने कहा तुम्हें 17 चौकड़ी असंख्या युग का राज्य देता हूं। अपने बड़े भाई कुरम से बीज लेकर शून्य में एक अलग ब्रह्मांड की रचना बनाओ। निरंजन ने बिनती किए बिना कुरम के तीन सीस काट डाले और उनके पेट से पांच तत्व का बीज छीन लिया। इस तरह निरंजन ने 49 क्रोड़ योजन पृथ्वी, सूर्य, चंद्र, तारे सप्त पाताल, सप्त लोक आदि सब बना दिये और शून्य में रहने लगा लेकिन वहां जीव नहीं थे, सोचा जीव नहीं तो ब्रह्मांड का क्या लाभ। अतः उसने पुनः 64 युग तक फिर परमपुरुष का ध्यान किया। परम पुरुष ने पूछा अब क्या चाहते हो ? निरंजन ने कहा जीव ही नहीं है तो राज्य किस पर करूँ। इस लिए कृप्या कर थोड़े से जीव मुझे भी दे दो।

अब परमपुरुष ने आदि शक्ति की उत्पत्ति कर उसे अनन्त आत्मायें देकर कहां हे ! पुत्री मानसरोवर में निरंजन के पास जाओ और