निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
DevanagariHindipublished112 pages
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112 साहिब बन्दगी
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मैं कहता हूँ आँखिन देखी
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गुरु संजीवन नाम बतावे
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नाम बिना नर भटक मरे
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रोगों की पहचान
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यह संसार काल को देशा
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न्यारी भक्ति
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साहिब तेरी साहिबी सब घट रही समाय
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जाप मरे अजपा मरे अनहद भी मर जाए
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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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सुरति समानी नाम में
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सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल
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निराले सद्गुरु
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कुँजड़ों की हाट में हीरे का क्या मोल
सन्तो सो सतगुरु मोहे भावे, जो आवागमन मिटावै।
द्वार न मूदे पवन न रोके, न अनहद उरझावे॥