निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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क्या चीज़ है! उसको तो शरीर भी नहीं है, फिर शरीर वाले किसी इंसान की बात क्या करनी! कहने का मतलब है कि आप कभी थकते नहीं हैं। और 10 घण्टे का काम 3-4 घण्टे में ही कर लेते हैं। शरीर और दिमाग़ दोनों से आप बेहिसाब काम लेते हैं। इस शरीर को तो आप घोड़ा बनाकर कार्य लेते हैं। शरीर होकर आप कभी नहीं जीते।
राँजड़ी में सुबह आपको 400-500 लोगों की कहानियाँ सुननी पड़ती हैं और उन्हें सुनते-सुनते सैकड़ों काम भी करने होते हैं। क्योंकि कई आश्रमों का काम चल रहा होता है तो वहाँ का सामान पहुँचाना, सब व्यवस्था ठीक करना भी आपके जिम्मे है। फिर जहाँ-2 रोज़ का सत्संग होता है, वहाँ-2 जो-जो सामान भेजना है, वो भी आपके जिम्मे है। कोई भी इन कार्यों को करने के लिए नहीं है। हर काम में आप स्वयं ही शामिल हैं। फिर कई बार संगत के लिए खाना भी खुद बनाते हैं, खुद ही परोसते हैं। यह सब देखते ही बनता है।
कई बार आप अपने व्यायाम का समय भी नहीं निकाल पाते हैं, योगासन का समय भी नहीं निकाल पाते हैं। आश्रम के सब काम खुद करवाने, लोगों को काम में लगाना और कई बार खुद भी जुट जाना। खुद ही गैंती पकड़कर कुछ तोड़ने लगना, कभी खड्डा खोदने लगना आदि यह सब राँजड़ी जाने वाला ही समझ सकता है। ऐसा काम कोई महात्मा नहीं करेगा। कर ही नहीं पायेगा।
जितने कर्मठ आप हैं, कोई नहीं हो सकता है। अन्य महात्माओं की बात छोड़ो; वो तो राजाओं का जीवन जीते हैं, पर अन्य कर्मठ लोगों में भी कोई नहीं होगा। आपका मुकाबला नहीं है।
कई बार आपको राँजड़ी में काम करते-करते दो-ढाई तक बज जाते हैं। कई बार आप बिना नाश्ता किए ही वहाँ से सत्संग के लिए रवाना हो जाते हैं, क्योंकि नाश्ते का समय ही आपको नहीं मिल पाता है। सच