निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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आपको अलौकिक दुनिया में जाकर वहाँ के लोगों को चेतन करना होता है।
सुबह पुनः 4 बजे उठकर आप नित्य-कर्म करके कठिन परिश्रम में लग जाते हैं और कभी बोर नहीं होते।
वो समय भी था....
एक समय वो भी आया जब बढ़ते हुए विरोध के डर के कारण आपको सबने छोड़ दिया। विरोध के कारण लोग अपने घर में फोटो रखने में भी डरने लगे, साहिब बंदगी बोलना भी छोड़ दिया। पर आपने हिम्मत नहीं हारी, अपनी लय बरकरार रखी। न ही आपने अपनी वाणी में बदलाव लाया, न ही किसी से डरे। आप दुनिया को समझाते रहे। सी.बी.आई., आई. बी. की जाँच हुई। जाँच में कुछ नहीं आया, सुप्रीम कोर्ट ने भी आपको सत्संग वगैरह की छूट दे दी। सुर्पीम कोर्ट ने कहा कि आप सच्चे महात्मा है, आपको बेकार में तंग किया गया, आप अपना काम आज़ादी से कीजिए। आप लगे रहे; सत्संग करते रहे। आपने पुनः संगत को जोड़ा।
एक ही धुन में रहते हैं आप
आप जो दिन-रात इतनी मेहनत कर रहे हैं, उसमें एक ही धुन नज़र आती है। आप जो इतने आश्रम बनवा रहे हैं, उसमें भी एक ही धुन दिखाई देती है। ज़ालिम दुनिया द्वारा इतने कष्ट सहते हुए भी आप उन्हें क्षमा कर रहे हैं तो उसमें भी एक ही धुन दिखाई पड़ती है। आप इस संसार में आए हैं तो उसमें भी वही एक धुन नज़र आती है। आपमें यही धुन है कि सत्संग द्वारा जितने हो सकें, उतने लोगों को समझा सत्य-भक्ति में लगाकर अमर लोक ले जाएँ। आप इसी धुन में रहते हैं।