BharatKosha
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

by आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय)

DevanagariHindipublished220 pages

Page 14 of 220

Read in context
Page 14

( १० ) कार्य को शीघ्र से शीघ्र पूरा कर देने के लिये प्रेरित करते हुए साहित्यिक साधन भी उपलब्ध किये, किन्तु मुझे खेद है कि मैं अपने मित्र के अभिलाष के अनुकूल आचरण न कर सका और विलम्ब करता रहा । मैं इन सौजन्यमूर्त्ति का आभारी हूँ कि इन्होंने अपनी उदारवृत्ति के कारण कभी भी खीझ का अनुभव नहीं किया और मुझे बराबर प्रेरित ही करते रहे । मैंने इसका गम्भीर अध्ययन नहीं किया है और यावद्बुद्धि इसका हिन्दी अनुवाद अन्य कार्यों की व्यस्तता के साथ सम्पन्न किया है। कहीं अर्थ का अनर्थ भी हुआ होगा । पर मेरी इच्छा है कि इसके पाठान्तरों का कई प्रतियों से मिलान कर तथा ग्रन्थकार के समय आदि के विषय में सम्यग् अध्ययन कर मैं इसका प्रामाणिक संस्करण प्रस्तुत करूं अतः तब तक विद्वज्जन मुझे इसकी त्रुटियों के विषय में सूचित करते रहें और मुझे मेरी भूलों के लिये क्षमा करें । अनुवाद करते समय वर्त्तमान किन्तु सम्प्रति दिवङ्गता मेरी साध्वी धर्मपत्नी ने जो सुख सुविधा तत्काल प्रदान की थी तदर्थ उसकी सौम्य मूर्त्ति संगमरमर की शुभ्रशिला पर कुशल शिल्पी द्वारा उत्कीर्ण जीवन्त प्रतिमा के समान मूर्त्तिमती हो उठी है और उसके लिये मैं उसको इस समय सप्रेम स्मरण करता हूँ । इस ग्रन्थ के प्रकाशन में चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस तथा चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी के अध्यक्ष महोदय ने जो तत्परता और उदारता बरती है वह उनकी शालीनता, संस्कृत भाषा के प्रसार के प्रति सजीव निष्ठा और सदाशयता के अनुरूप ही है अतः उनसे उपकृत अनेकानेक विद्वज्जनों की भाँति मैं भी उनके प्रति अपना हार्दिक हर्षभार प्रकट करता हूँ । दीपावली | —रामचन्द्र मालवीय सं० २०२९ |