पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
by मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल
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६ पद्मावत । एतो कीन्ह सबगुण प्रगटो । अबहुँ समुद्र महँ बूंद न घटा ॥ ऐसो जानि मन गर्व न होय । गर्व करे मन बावर सोय ॥ दो० बड़ गुणवंत गुसोई, चही सँवारी बेग । औ असगुणी सँवारी, जो गुणचही अनेक ॥ कीन्हेसि पुरुष⁶ एक निरमरा⁷ । नाम मुहम्मद पूनों करा⁸ ॥ प्रथम⁹ ज्योति बिधितों¹⁰ कीसाजी । औ तेहिप्रीति¹¹ सृष्टि¹² उपराजी ॥ दीपक¹³ लेश जगतै¹⁴ कहिदीन्हा । भानिरमलै¹⁵ जगै¹⁶ मारग¹⁷ चीन्हा ॥ जो न होत अस पुरुष उज्यारा । सूझिनपरत पंथै अँधियारा ॥ दूसरे ठाउँ दीबी लिखी । वही धर्म जो पढ़त सीखी ॥ जेहि न लीन्हजन्म सो नाउँ । ताकहँदीन्ह नरकमहँ ठाउँ ॥ जगैबसीठ²⁰ दईवे²¹ कीन्ही । दुइजगै²² तरानाउँ तेहिलीन्ही ॥ दो० गुण अवगुण²³ बिधि²⁴ पूंछत, होय लेख औजोख²⁵ । तेहिं बिनवब आगे होय, करै जगतै²⁶ करमोख²⁷ ॥ चार मीत²⁸ जो मुहम्मद ठाउँ²⁹ । जेहिकदीन्ह जगै³⁰ निरमलै³¹ नाउँ ॥ अबूबक्र सदीक़ सयाने । पहिले सिदक़दीन वहि आने ॥ पुनि सो उमर खिताब सुहाये । भा जगै अदलै³³ दीन जो आये ॥ पुनि उसमान बड़ पण्डितगुनी । लिखापुराण जो आयत सुनी ॥ चौथे अलीसिंह³⁴ बरियारू³⁵ । सौहिं³⁶ ना कोई रहा जुझारू³⁷ ॥ चार्यो एकमते³⁸ एक बानी । एक पंथ³⁹ औ एक संघांना ॥
[पाद-टिप्पणियाँ / शब्दार्थ]: ...ज़ाहिर करना १ ग़रूर २-३ ईश्वर ४ जल्द ५ बहुत ६ शख़्स ७ पाक ८ चौदहौं रातिका चांद ६ पहिले १० ईश्वर ११ मुहब्बत १२ दुनिया पैदाकी १३ चिराग़ १४ दुनिया १५ पाक १६ संसार १७ राह १८-१६ जगह २०-२१ दुनियाका क़ासिद २२ दोनों जहान २३ पाप और पुण्य २४ ईश्वर २५ हिसाब २६ दुनिया २७ बन्द से छोड़ना २८ दोस्त २६ जगह ३० दुनिया ३१ पवित्र ३२ संसार ३३ न्याय ३४ शेर ३५ ज़बरदस्त ३६ सामना करनेवाला ३७ लड़नेवाला ३८ एकसलाह ३६ राह ४०॥