फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
by मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास)
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Read in contextनवाँ अध्याय : राशिफल २११ होते हैं और कभी वृद्धि को अर्थात् इनकी आर्थिक स्थिति में उतार चढ़ाव आता रहता है। ॥१॥ जिनकी मीन राशि होती है या जन्म के समय मीन लग्न होता है उनके शरीर के अंग बराबर (जितने बड़े होने चाहिएँ) और सुन्दर होते हैं। ऐसे व्यक्ति की दृष्टि बहुत सुन्दर होती है। ये लोग विद्वान्, कृतज्ञ, अपनी स्त्री में सन्तुष्ट रहने वाले (अर्थात् अन्य स्त्री प्रसंग से रहित) भाग्यवान् होते हैं। जल से उत्पन्न पदार्थों द्वारा इन्हें धन प्राप्त होता है। आजकल के समय में समुद्र पार से आने जाने वाले पदार्थों को भी हम लोग जल से उत्पन्न या सम्बन्धित मान सकते हैं। ऐसे जातक अपने अमित्रों (शत्रुओं) को परास्त कर उन पर विजय प्राप्त करते हैं। राशेः स्वभावाश्रयरूपवर्णान् ज्ञात्वानुरूपाणि फलानि तस्य । युक्त्या वदेदत्र फलं विलग्ने यच्चन्द्रलग्नेऽपि तदेव वाच्यम् ॥१३॥ ग्रहे सति निजोच्चगे भवति रत्नगर्भाधिपो महीपतिकृतस्तुतिर्महितसंपदामालयः । उदारगुणसंयुतो जयति विक्रमार्को यथा नये यशसि विक्रमे वितरणे धृतौ कौशले ॥१४॥ स्वमन्दिरगते ग्रहे प्रभुपरिग्रहादार्यतं प्रभुत्वमपि वा गृहस्थितिमचञ्चलां प्राप्नुयात् । नवं भुवनमुर्वराक्षितिमुपैति काले स्वके जने बहुमतिं पुनः सकलनष्टवस्तून्यपि ॥१५॥ ग्रहः सुहृत्क्षेत्रगतः सुहृद्भिः कार्यस्य सिद्धिं नवसौहृदं च ।