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प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

by आदि शङ्कराचार्य

Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (origin)

DevanagariSanskritpublished86 pages

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प्रबोधसुधाकर संसारमें वैराग्यरूपी सौभाग्यके पात्र, प्रसन्नचित्त, विषयाशा- हीन और यथा-प्राप्त प्रारब्ध-फल भोगनेवाले पुरुषको इसी जन्ममें कृतार्थता प्राप्त हो जाती है। द्रव्यं पाणितलाच्च्युतं यदि भवेत्क्वापि प्रमादात्तदा शोकायाथ तदर्पितं श्रुतवते तोषाय च श्रेयसे । स्वातन्त्र्याद्विषयाः प्रयान्ति यदमी शोकाय ते स्युश्चिरं सन्त्यक्ताः स्वयमेव चेत्सुखमयं निःश्रेयसं तन्वते ॥८४॥ जिस प्रकार असावधानतावश हाथसे गिरा हुआ पदार्थ तो शोकका कारण होता है, किन्तु यदि उसे किसी श्रोत्रिय ब्राह्मणको दान कर दिया जाय तो वही सन्तोष और शुभ गतिका देने- वाला हो जाता है, उसी प्रकार यदि विषय अपने-आप छूटते हैं तब तो बहुत दिनोंतक खटकते रहते हैं; किन्तु यदि उन्हें अपनी इच्छासे छोड़ा जाय तो वे सुख और कल्याणके देनेवाले हो जाते हैं। विस्मृत्यात्मनिवासमुत्कटभवाटव्यां चिरं पर्यट- न्सन्तापत्रयदीर्घदावदहनज्वालावलीव्याकुलः । वल्गन्फल्गुषु सुप्रदीप्तनयनश्चेतःकुरङ्गो बला- दाशापाशवशीकृतोऽपि विषयव्याघ्रैर्मृषा हन्यते॥८५॥ अपने निवासस्थानको भूलकर चिरकालतक इस भयङ्कर संसार-वनमें भटकता और तापत्रयरूपी प्रचण्ड दावानलकी ज्वाला- २४