प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
by आदि शङ्कराचार्य
Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (origin)
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Read in contextसगुण-निर्गुणकी एकता ये सब ग्वालबाल और बछड़े पहले श्रीकृष्णरूप ही तो थे; इसलिये ऐसा करके श्रीकृष्णचन्द्रने इनमें अपनी प्रियतमताको दिखा दिया। प्रेयः पुत्राद्वित्तात्प्रेयोऽन्यस्माच्च सर्वस्मात् । अन्तरतरं यदात्मेत्युपनिषदः सत्यतामभिहिता॥२१४॥ उपनिषदोंने जो कहा है कि आत्मा पुत्रसे, वित्तसे तथा अन्य समस्त वस्तुओंसे भी प्रियतर और आन्तरिक है, उसको भगवान्ने सत्य करके दिखा दिया। नन्वूच्चावचभूतेष्वात्मा सम एव वर्ततेऽथ हरिः। दुर्योधनेऽर्जुने वा तरतमभावं कथं नु गतवान्सः।२१५। शंका—आत्मा तो ऊँच-नीच सभी प्राणियोंमें समान है, फिर भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुन और दुर्योधन आदिमें विषमभाव क्यों किया ? बधिरान्धपङ्गुमूका दीर्घाः खर्वाः सरूपाश्च । सर्वे विधिना दृष्टाः सवत्सगोपाश्चतुर्भुजास्तेन ॥२१६॥ समाधान—ब्रह्माने वहरे, अन्धे, पङ्गु, मूक, छोटे, बड़े सभी वछड़ोंको और ग्वालोंको चतुर्भुजरूप ही देखा था। भूतसमत्वं नृहरेः समो हि मशकेन नागेन । लोकैः समस्त्रिभिर्वेत्युपनिषदा भाषितः साक्षात्।२१७। ६१