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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

by महाकवि भास

DevanagariHindipublished178 pages

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( 20 ) (2) रामायण के अनुसार जब राजा दशरथ ने राम का राज्याभिषेक करना चाहा, उस समय भरत और शत्रुघ्न दोनो अयोध्या से अनुपस्थित थे। किन्तु भास के प्रतिमा नाटक के अनुसार उस समय शत्रुघ्न अयोध्या मे ही थे। ननिहाल में केवल भरत को ही बताया गया है। (3) दूसरे अंक में मृत्यु शय्या पर पड़े राजा दशरथ के सामने उनके स्वर्ग से आए पूर्वजो का जो दृश्य बताया गया है, वह भी भास की अपनी मौलिक कल्पना है। रामायण मे ऐसा वर्णन नही मिलता है। (4) तीसरे अंक की "प्रतिमा गृह" की कल्पना का भी रामायण में अभाव है। भास की इसी नाटकीय कल्पना के आधार पर 'प्रतिमा' नाटक का नामकरण किया गया है। इसमे नाटककार ने कुशलतापूर्वक भरत को उसकी अनुपस्थिति मे होने वाली घटनाओं से अवगत कराया है। (5) सीताहरण की घटना भी अत्यन्त कौतूहल पूर्ण है। दशरथ के श्राद्ध के लिए राम का चिन्तित होना, रावण का परिव्राजक के रूप मे राम के सामने उपस्थित होना तथा काञ्चनपार्श्व मृग आदि की कल्पनाएँ भास की निजी है। (6) इस अवसर पर लक्ष्मण का किसी कुलपति के स्वागत के लिए बाहर जाने का जो उल्लेख प्राप्त होता है, वह भी रामायण में नहीं है। (7) छठे अंक में सुमन्त्र का राम के दर्शन हेतु जनस्थान मे जाना और उनके माध्यम से भरत को सीताहरण की सूचना मिलना भी भास की सृष्टि है। रामायण मे ऐसा नही मिलता। (8) कैकेयी की निर्दोषिता प्रकट करने के लिए श्रवण वध एवं उसके पिता द्वारा दिए गए शाप का उपयोग जिस रूप मे किया गया है, वह भास की अपनी विशेषता है। (9) रामायण मे इस बात का संकेत नही है कि कैकेयी राम को केवल 14 दिन के लिए ही वन मे भेजना चाहती थी और घबराहट के कारण उसके मुख से "चौदह वर्ष" का कथन निकल गया। (10) छठे अंक के अन्त में रावण विजय के लिए भरत द्वारा अपनी सेना को तैयार करने का जो वर्णन किया गया है, यह भी भास की अपनी ही कल्पना है।