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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

by महाकवि भास

DevanagariHindipublished178 pages

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( 66 ) काञ्चुकीय—हे कुमार, मत जाइए । ये महाराज दशरथ-सीता के सँ आपका वनगमन तथा भ्रातृस्नेह के वशीभूत लक्ष्मण का अनुगमन न कर, वृद्ध महाराज उठ कर पृथ्वी की धूलि से धूसरित शरीर वा वन्य गजराज की भाँति काँपती चाल से आप लोगो को देखने के लि इधर ही आ रहे हैं । (३०) लक्ष्मण—आर्य, वस्त्र के रूप में केवल वल्कल मात्र को पहने हुए हम वन- वासियो को देखकर क्या करेंगे ? राम—हमारे चले जाने पर महाराज हमारे प्रधान निवास स्थानो को देखा करेंगे । (इस प्रकार सब निकल जाते हैं ) प्रथम अंक समाप्त ।

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