प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary
by महाकवि भास
DevanagariHindipublished178 pages
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( 84 ) राजा—(श्राचमन करके देखकर) ये देवराज इन्द्र के मित्र दिलीप हैं, ये रघु हैं, ये मेरे पूज्य पिता अज हैं । श्राप लोगो के यहाँ श्राने का क्या कारण है ? अब तो मेरे लिए भी श्रापके साथ रहने का समय श्रा पहुँचा है । र म, सीता, लक्ष्मण, मैं अब यहाँ से पितरों के पास जा रहा हूं । हे पितरों, यह मैं श्राया । (संज्ञा हीन हो जाते हैं ।) (काञ्चुकीय पर्दा गिराता है) सब—हाय, हाय, महाराज । हाय, हाय, महाराज । (सब निकलते हैं) दूसरा श्रंक समाप्त ।