प्रत्यभिज्ञाहृदयम् (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैवदर्शन एवं जयदेव सिंह सान्वय हिन्दी भाष्य)
Pratyabhijnahridayam of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
by आचार्य क्षेमराज
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Read in contextशुद्धिपत्र पृष्ठ पंक्ति (ऊपर से) अशुद्ध शुद्ध ४ ४ सिद्दान्त सिद्धान्त ६ ११ प्रत्यभिक्षा प्रत्यभिज्ञा ११ १९ सृष्टि और संसार सृष्टि और संहार १२ ७ अस्फुटत्सात अस्फुटत्वात् १२ २६ वैद्य वेद्य १३ १० अहम अहम् १३ २२ पांच पाँच १४ ४ पांच पाँच १४ २० कंचकों कंचुकों १७ १४ अनपह्नवनवनीयः अनपह्नवनीयः २३ २३ शंकरवेदान्त शांकरवेदान्त २४ ३१ होगा होता ३१ २२ संस्कृति संसृति ३५ ५ प्रभाता प्रमाता ३८ २५ अविर्भाव आविर्भाव ४३ ३ प्रत्याभिज्ञाहृदय प्रत्यभिज्ञाहृदय १ ४५ ८ स्फरति स्फुरति ४७ २४ ज्ञाता का उदय ज्ञान का उदय ५३ २२ अन्यत्र कहा है अन्यत्र कहा है ७ ५७ १४ अनुसप अनुभव ५९ पादटिप्पणी शिवप्रमाता १-शिवप्रमाता ६५ १६ भक्तों की भक्तों को ६५ २२ वह शक्ति वह अपने शक्ति ७० ७ व्यामोहित्वं व्यामोहितत्वं ७५ १७ चिदानन्दघनमय १२६ चिदानन्दघनमय व्यानशक्ति ब्यानशक्ति १२६ ७६ ५ शिप शिव ८१ २४ दृढ़ता ही दृढ़ता हो ८९ २३ चित्तधृत्ति चित्तवृत्ति ९० ११ विस्नार विस्तार ९२ १३ भीतरस्थिति भीतरस्थित