राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि
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प्रस्तुत पुस्तक का यह नवीन तृतीय संस्करण पाठकों के हाथ में रखते हुए हमें बड़ी प्रसन्नता हो रही है। इस पुस्तक में पातंजल-योगसूत्र, उन सूत्रों के अर्थ और उन पर स्वामी विवेकानन्दजी की टीका भी सम्मिलित है। पातंजल-योगदर्शन एक विश्व-विख्यात ग्रन्थ है और हिन्दुओं के सारे मनोविज्ञान की नींव है। इसीलिए स्वामीजी स्वयं इस महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ पर टीका लिख गए हैं। इस ग्रन्थ की माँग, विशेषकर स्वामीजी की टीका सहित, हिन्दी-जनता बहुत अरसे से कर रही थी। परमात्मा की कृपा से हम पाठकों की माँग पूरी करने में सफल हो सके—इसका हमें विशेष आनन्द है।
प्रत्येक व्यक्ति में अनन्त ज्ञान और शक्ति का आवास है। राजयोग उन्हें जागृत करने का मार्ग प्रदर्शित करता है। इसका एकमात्र उद्देश्य है—मनुष्य के मन को एकाग्र कर उसे 'समाधि' नामवाली पूर्ण एकाग्रता की अवस्था में पहुँचा देना। स्वभाव से ही मानव-मन अतिशय चंचल है। वह एक क्षण भी किसी वस्तु पर ठहर नहीं सकता। इस मन की चंचलता को नष्ट कर उसे किस प्रकार अपने काबू में लाना, किस प्रकार उसकी इतस्ततः बिखरी हुई शक्तियों को समेटकर सर्वोच्च ध्येय में एकाग्र कर देना—यही राजयोग का विषय है। जो साधक प्राण का संयम कर, प्रत्याहार, धारणा और ध्यान द्वारा इस समाधि-अवस्था की प्राप्ति करना चाहते हैं, उनके लिए यह ग्रन्थ बड़ा उपादेय सिद्ध होगा।
इस पुस्तक के आरम्भ से लेकर १०५ पृष्ठ तक का अनुवाद पण्डित सूर्यकान्तजी त्रिपाठी 'निराला' ने किया है। उनके इस बहुमूल्य कार्य के लिए हम उनके परम कृतज्ञ हैं।