राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि
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प्रतीक्षा करते हुए थोडा-थोडा करके अग्रसर न होकर, प्रकृति के अनन्त शक्ति-भाण्डार मे से शक्ति ग्रहण करने की शक्ति बढाकर किस प्रकार शीघ्र मुक्ति-लाभ किया जा सकता है, योगियो ने इसका उपाय खोज निकाला है। ससार के सभी महापुरुष, साधु और सिद्ध पुरुषो ने क्या किया है ? उन्होने एक जन्म मे ही, समय को कम करके, उन सब अवस्थाओ का भोग कर लिया है, जिनमे से होते हुए साधारण मानव करोडो जन्मो मे मुक्त होता है। एक जन्म मे ही वे अपनी मुक्ति का मार्ग तय कर लेते है। वे दूसरी कोई चिन्ता नही करते, दूसरी बात के लिए एक निमिषमात्र भी समय नही देते। उनका पल भर भी व्यर्थ नही जाता। इस प्रकार उनकी मुक्ति का समय घट जाता है। एकाग्रता का यही अर्थ है कि शक्ति-सचय की क्षमता को बढाकर समय को घटा लेना। राजयोग इसी एकाग्रता की शक्ति को प्राप्त करने का विज्ञान है।
इस प्राणायाम के साथ प्रेततत्त्व (spiritualism) का क्या सम्बन्ध है ? वह भी एक तरह का प्राणायाम है। यदि यह सत्य हो कि परलोकगत आत्मा का अस्तित्व है और उसे हम देख भर नही पाते, तो यह भी बहुत सम्भव है कि यही पर शायद लाखो आत्माएँ है, जिन्हे हम न देख पाते है, न अनुभव कर पाते है, न छू पाते है। सम्भव है, हम सदा उनके शरीर के भीतर से आ-जा रहे हो। और यह भी बहुत सम्भव है कि वे भी हमे देखने या किसी प्रकार से अनुभव करने मे असमर्थ हो। यह मानो एक वृत्त के भीतर एक और वृत्त है, एक जगत् के भीतर एक और जगत्। जो एक ही भूमि (plane) पर रहते है, वे ही एक दूसरे को देख सकते है। हम पचेन्द्रियविशिष्ट प्राणी