राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि
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तरल पदार्थ है, उसमे तैरता रहता है। अत यदि सिर पर कोई आघात लगे, तो उस आघात की शक्ति उस तरल पदार्थ मे बिखर जाती है, और इससे उस बल्ब को कोई चोट नही पहुँचती। यह एक महत्त्वपूर्ण बात है, जो हमे स्मरण रखनी चाहिए। दूसरे, हमे यह भी जान लेना होगा कि इन सब चक्रो मे से सबसे नीचे स्थित मूलाधार, मस्तिष्क मे स्थित सहस्रार और नाभिदेश मे स्थित मणिपूर—इन तीन चक्रो की बात हमे विशेष रूप से ध्यान में रखनी होगी।
अब पदार्थ-विज्ञान का एक तत्त्व हमे समझना है। हम लोगो ने विद्युत् और उससे सयुक्त अन्य बहुविध शक्तियो की बाते सुनी हैं। विद्युत् क्या है, यह किसी को मालूम नही। हम लोग इतना ही जानते है कि विद्युत् एक प्रकार की गति है। जगत् मे और भी अनेक प्रकार की गतियां हैं, विद्युत् से उनका भेद क्या है? मान लो, यह टेबुल चल रहा है और उसके परमाणु विभिन्न दिशाओ मे जा रहे हैं। अब यदि उनको अनवरत एक ही दिशा मे चलाया जाय, तो वही गति विद्युत् की शक्ति मे परिणत हो जायगी। समस्त परमाणु यदि एक ओर गतिशील हो, तो उसी को वैद्युत-गति कहते हैं। इस कमरे मे जो वायु है, उसके सारे परमाणुओं को यदि लगातार एक ओर चलाया जाय, तो यह कमरा एक महान् विद्युदाधार-यन्त्र (battery) के रूप मे परिणत हो जायगा।
शारीरविधानशास्त्र की एक और बात हमें स्मरण करनी होगी। वह यह कि जो स्नायु-केन्द्र श्वास-प्रश्वास-यन्त्रो को नियमित करता है, उसका सारे स्नायु-प्रवाहो पर भी कुछ अधिकार है। यह केन्द्र वक्ष के ठीक दूसरी ओर मेरुदण्ड में अवस्थित है। यह