रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)
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Read in context२७८ रसतरङ्गिणी हैं। एक तोला फिटकरी को पचास तोला शुद्ध जल में घोलकर सावधानी से योनिबस्ति देने से प्रसूतावस्था में अपने स्थान से गिरा हुआ पीड़ा युक्त गर्भा- शय अपने स्थान में आ जाता है और उसका रक्तस्राव भी बन्द हो जाता है। इसके प्रयोग से शिथिलयोनि अपने स्थान पर आ जाती है। उसमें यदि कण्डू या प्रदर (सफेद पानी) गिरता हो तो वह भी शीघ्र अच्छा हो जाता है। एक रत्ती फिटकरी को रससिन्दूर में मिलाकर खाने से अधोग तथा ऊर्ध्वग दोनों प्रकार का रक्तपित्त शान्त हो जाता है। कच्चे सीसे के खाने से होनेवाले उदरशूल में दो रत्ती फिटकरी को मिश्री के साथ खिलाने से वह शीघ्र ही बन्द हो जाता है। फिटकरीचूर्ण में मौलश्री वृक्ष की छाल का चूर्ण मिलाकर दाँतों में रगड़ने से दाँत मजबूत होते हैं। दो रत्ती फिटकरी को इन्द्रजौ चूर्ण में मिलाकर खाने से भयंकर अतिसार शीघ्र बन्द हो जाता है। फिटकरी चूर्ण को लौंग, इलायची और मिश्री चूर्ण में मिलाकर दाँतों में रगड़ने से दन्तशर्करा नष्ट हो जाती है। एक तोला सेंधानामक और एक कर्ष फिटकरी एकत्र मिलाकर दाँतों में रगड़ने से दांतों का स्राव और लिसलि- सापन दूर हो जाता है। पाँच तोले जल में पाँच रत्ती फिटकरी घोलकर इस जल से कुल्ला करने से दन्तपैच्छिल्य, मुखपाक, कण्ठशुंडी और शोथयुक्त पुरानी अधिजिह्वा की पीड़ा शान्त हो जाती है ॥ १८४-२०७ ॥ वक्तव्य—विषमज्वर में फिटकरी फूला ३ रत्ती, खांड ३ रत्ती मिलाकर ज्वर आने से ६ घंटे पूर्व ३ मात्रा दो-दो घंटे में देने से ज्वर नहीं चढ़ता है। अथ खटिकाया नामानि खटिका खटिनी चैव खटी लेखनमृत्तिका । कठिनी वै कठिनिका वर्णिका वर्णलेखिका ॥ २०८ ॥ अथ खटिकानामानि—व्यवहृतप्रायाणि ॥ २०८ ॥ भा.टी.—खटिका, खटिनी, खटी, लेखनमृत्तिका, कठिनी, कठिनिका, वर्णिका, वर्णलेखिका, ये नाम खड़ियामिट्टी या चाकमिट्टी के हैं ॥ २०८ ॥ खटिकाया भेदौ खटिका द्विविधा ख्याता खटी गौरखटी तथा । खटी तु मलिना चान्या श्वेता मृदुशिलोपमा ॥ २०९ ॥ भा.टी.—खड़िया के दो भेद माने जाते हैं। १-खटी (साधारण खड़िया),