रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)
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Read in context२८६ रसतरङ्गिणी प्रक्षालयेच्छङ्खखण्डान् प्रतप्तेनाम्भसा ततः । इत्थं नातिचिरादेवं शङ्खः शुद्धिंमवाप्नुयात् ॥७॥ भा.टी.—शंख के टुकड़े करके एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें, अब इसको दोलायन्त्र में जम्भीरी नींबू का रस डालकर चार पहर तक पकावें । इसके बाद पोटली को खोलकर शंख के टुकड़ों को गरम जल से साफ कर लें। इस विधि से शीघ्र ही शंख शुद्ध हो जाता है ॥ ६-७ ॥ द्वितीयः शोधनप्रकारः जयन्त्याः स्वरसेनैव शंखं दोलागतं पचेत् । यामैकं पाचनादेव शुद्धिमायात्यनुत्तमाम् ॥८॥ भा.टी.—जयन्ती (अरणी) के स्वरस को दोलायन्त्र में डालकर इसमें शंख को एक पहर तक पोटली में बांधकर पकाने से वह शुद्ध हो जाता है ॥८॥ तृतीयः शोधनप्रकारः ताण्डुलीयद्रवेणेह शंखं दोलागतं पचेत् । यामैकं पाचनादेव शुद्धिमायात्यनुत्तमाम् ॥६॥ भा.टी.—चौलाई के स्वरस को दोलायन्त्र में डाल कर इसमें शंख की पोटली को एक पहर पकाने से भी शंख शुद्ध हो जाता है ॥ ६ ॥ चतुर्थः शोधनप्रकारः काञ्जिकेन पचेच्छंखं दोलायन्त्रे भिषग्वरः । क्षालयेच्चोष्णतोयेन शंखः शुद्धिंमवाप्नुयात् ॥१०॥ भा.टी.—दोलायन्त्र में काञ्जी भर कर उसमें शंखकी पोटली को एक पहर तक पका करके पश्चात् उसे गरम जल से धो लेने पर वह शुद्ध हो जाता है ॥१०॥ पञ्चमः शोधन प्रकारः निम्बूकाम्लसमायुक्तवारा दोलाख्ययन्त्रके । यामार्द्धं पाचितः शंखः शुद्धिमायात्यनुत्तमाम् ॥११॥ शंखशोधनस्य बहवः प्रकाराः शोधकसौकर्यार्थम्। निम्बूकाम्लं प्रागुक्तम् ।११। भा.टी.—पूर्वोक्त नींबूकाम्ल में जल मिला इसको दोलायन्त्र में डालकर इसमें डेढ़ घंटे तक शंख की पोटली को पकाने से शंख शुद्ध हो जाता है ॥११॥ विशुद्धशंखस्य प्रयोगाः त्रिरेखवर्तिका माषकप्रमित। कृष्णा मरिचं माषकद्वयम् ।