ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1009 of 1855
Read in contextमैं उन वृद्धिशाली व तेजस्वी खड्ग-वाले रुद्रपुत्रों की सेवा स्तोत्रों द्वारा करता हूं. स्तोता की पवित्र स्तुतियां उग्र बनकर मरुतों के बल की उसी प्रकार समानता करती हैं, जिस प्रकार बादल करते हैं. (११) सूक्त—६७ देवता—मित्र व वरुण विश्वेषां वः सतां ज्येष्ठतमा गीर्भिर्मित्रावरुणा वावृधध्ये. सं या रश्मेव यमतुर्यमिष्ठा द्वा जनाँ असमा बाहुभिः स्वैः.. (१) हे सकल विश्व में श्रेष्ठ मित्र एवं वरुण! मैं स्तुतियों द्वारा तुम्हें बढ़ाता हूं. परस्पर असमान एवं उत्तम-नियंता तुम दोनों रस्सी के समान मनुष्यों को बांध लेते हो. (१) इयं मद्वां प्र स्तृणीते मनीशोप प्रिया नमसा बर्हिरच्छ. यन्तं नो मित्रावरुणावधृष्टं छर्दैर्यद्वां वरूथ्यं सुदानू.. (२) हे प्रिय मित्र एवं वरुण! मेरी यह स्तुति तुम्हें ढक लेती है, हव्य के साथ तुम्हारे पास जाती है एवं तुम्हारे यज्ञ में पहुंचती है. हे शोभनदान वाले मित्र और वरुण! हमें ठंड और हवा रोकने वाला तथा शत्रुओं द्वारा अविजित घर दो. (२) आ यातं मित्रावरुणा सुशस्त्युप प्रिया नमसा हूयमाना. सं यावप्रः स्थो अपसेव चनाञ्छुधीयतश्चिद्यतथो महित्वा.. (३) हे मित्र और वरुण! शोभनवचन वाले स्तोत्रों एवं हव्यान्न द्वारा बुलाए हुए तुम दोनों आओ. कर्म का अधिकारी जिस प्रकार कर्म द्वारा अन्न चाहने वाले लोगों को वश में करता है, उसी प्रकार तुम अपने महत्त्व से ऐसे लोगों को वश में करो. (३) अश्वा न या वाजिना पूतबन्धू ऋता यद् गर्भमदितिर्भरध्यै. प्र या महि महान्ता जायमाना घोरा मर्ताय रिपवे नि दीधः.. (४) अश्वों के समान बलशाली, पवित्र स्तुतियों वाले एवं सत्ययुक्त मित्र एवं वरुण को अदिति ने गर्भ के रूप में धारण किया. अदिति ने महान् लोगों से भी बड़े एवं हिंसकों की भी हिंसा करने वाले मित्र और वरुण को धारण किया. (४) विश्वे यद्वां मंहना मन्दमानाः क्षत्रं देवासो अदधुः सजोषाः. परि यद्भूथो रोदसी चिदुर्वी सन्ति स्पशो अदब्धासो अमूराः.. (५) सब देवों ने परस्पर प्रेमपूर्वक तुम्हारे महत्त्व की स्तुति करते हुए बल धारण किया था. तुमने विस्तृत धरती-आकाश को पराजित किया है एवं तुम्हारी किरणें अपराजित तथा शक्तिशालिनी हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*