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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1048 of 1855

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वृणाना अत्र सख्याय सख्यं त्वायन्तो ये अमदन्ननु त्वा.. (१२) वज्रबाहु इंद्र ने श्रुत, कवष, वृद्ध व द्रुह्यु नाम के लोगों को पानी में डुबा दिया था. इस अवसर पर जिन्होंने तुम्हारी स्तुति की, उन्होंने मित्र बनकर तुम्हारी मित्रता प्राप्त की. (१२) वि सद्यो विश्वा दृंहितान्येषामिन्द्रः पुरः सहसा सप्त दर्दः. व्यानवस्य तृत्सवे गयं भाग्जेष्म पूरुं विदथे मृध्रवाचम्.. (१३) इंद्र ने श्रुत आदि की समस्त दृढ़ नगरियों एवं सात प्रकार के रक्षासाधनों को बल द्वारा नष्ट कर दिया था तथा अनु के पुत्र का धन तृत्सु को दे दिया था. हे इंद्र! हम युद्ध में कठोरवचन वाले शत्रु को जीत सकें. (१३) नि गव्यवोऽनवो द्रुह्यवश्च षष्टिः शता सुषुपुः षट् सहस्रा. षष्ठिर्वीरासो अधि षड् दुवोयु विश्वेदिन्द्रस्य वीर्या कृतानि.. (१४) गायों की अभिलाषा करने वाले अनु और द्रुह्यु के छियासठ हजार छियासठ वीर सैनिक इंद्र की सेवा के इच्छुक सुदास के कारण मारे गए थे. ये सब कार्य इंद्र की वीरता के हैं. (१४) इन्द्रेणैते तृत्सवो वेविषाणा आपो न सृष्टा अधवन्त नीचीः. दुर्मित्रासः प्रकलविन् मिमाना जहुर्विश्वानि भोजना सुदासे.. (१५) ये तृत्सु लोग इंद्र के बुरे मित्र एवं ज्ञानहीन हैं. ये इंद्र के साथ युद्ध करने लगे और युद्ध छोड़ने की इच्छा से इस प्रकार भागे, जैसे नीचे की ओर बहने वाला पानी दौड़ता है. सुदास के द्वारा रोकने पर उन्होंने प्रयोग की सब चीजें सुदास को दे दीं. (१५) अर्धं वीरस्य शृतपामनिन्द्रं परा शर्धन्तं नुनुदे अभि क्षाम्. इन्द्रो मन्युं मन्युम्यो मिमाय भेजे पथो वर्तनिं पत्यमानः.. (१६) इंद्र ने ऐसे लोगों को मारकर धरती पर गिरा दिया था जो शक्तिशाली सुदास के हिंसक थे, इंद्र को नहीं मानते थे, हव्य के पालक और उत्साही थे. इंद्र ने क्रोधियों का क्रोध समाप्त कर दिया. सुदास का शत्रु पलायन के मार्ग पर चला गया. (१६) आध्रेण चित्तद्वेकं चकार सिंह्यं चित्पेत्वेना जघान. अव सक्तीर्वेश्यावृश्चदिन्द्रः प्रायच्छद्विश्वा भोजना सुदासे.. (१७) इंद्र ने दरिद्र सुदास से उस समय एक काम कराया था. सिंह जैसे शत्रु को बकरे तुल्य सुदास से मरवाया, यूप, तुला शत्रुओं को सुई के समान सुदास से विद्ध कराया. इंद्र ने सब धन सुदास को दे दिया. (१७) शश्वन्तो हि शत्रवो रारधुष्टे भेदस्य चिच्छर्धतो विन्द रन्धिम्. ebook converter DEMO Watermarks*