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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1138 of 1855

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Page 1138

समानमिन्मे कवयश्चिदाहुरयं ह तुभ्यं वरुणो हृणीते.. (३) हे वरुण! तुम्हारे दर्शन का इच्छुक होकर मैं वह पाप पूछता हूं. मैं विविध प्रश्न पूछने के लिए विद्वानों के समीप गया हूं. सब विद्वानों ने मुझसे एक ही बात कही है कि वरुण तुमसे नाराज हैं. (३) किमाग आस वरुण ज्येष्ठं यत्स्तोतारं जिघांससि सखायम्. प्र तन्मे वोचो दूळभ स्वधावोऽव त्वानेना नमसा तुर इयाम्.. (४) हे वरुण! मेरा ऐसा क्या महान् अपराध है कि तुम मेरे मित्र स्तोता को मारना चाहते हो? हे अपराजेय एवं तेजस्वी वरुण! मुझे वह अपराध बताओ जिससे मैं उसका प्रायश्चित्त करके निरपराध बनूं एवं नमस्कार के साथ शीघ्र तुम्हारे समीप आऊं. (४) अवि द्रुग्धानि पित्र्या सृजा नोऽव या वयं चकृमा तनूभिः. अव राजन्पशुतृपं न तायुं सृजा वत्सं न दाम्नो वसिष्ठम्.. (५) हे वरुण! हमारी पैतृक द्रोहभावना को हमसे अलग करो. हमने अपने शरीर से जो अपराध किया है, उससे भी हमें मुक्त करो. हे सुशोभित वरुण! मुझ वसिष्ठ की दशा चुराकर लाए पशु को प्रायश्चित्तरूप में घास खिलाने अथवा रस्सी से बंधे बछड़े के समान है. तुम मुझे पाप से छुड़ाओ. (५) न स स्वो दक्षो वरुण ध्रुतिः सा सुरा मन्युर्विभीदको अचित्तिः. अस्ति ज्यायान्कनीयस उपारे स्वप्नश्चनेदनृतस्य प्रयोता.. (६) हे वरुण! वह पाप हमारे बल के कारण नहीं है. प्रमाद, क्रोध, जुआ अथवा अज्ञान के रूप में देवगति ही उसका कारण है. छोटे को पाप की ओर प्रवृत्त करने में बड़ा कारण बनता है. स्वप्न भी पाप से मिलाने वाला है. (६) अरं दासो न मीळहुषे कराण्यहं देवाय भूर्णयेऽनागाः. अचेतयदचितो देवो अर्यो गृत्सं राये कवितरो जुनाति.. (७) मैं पापरहित होकर अभिलाषापूरक एवं विश्वपालक वरुण की सेवा दास के समान पर्याप्तरूप में करूंगा. सबके स्वामी वरुण देव, मुझ ज्ञानरहित को ज्ञान संपन्न करें. अतिशय विद्वान् वरुण स्तोता को धन पाने के लिए प्रेरित करें. (७) अयं सु तुभ्यं वरुण स्वधावो हृदि स्तोम उपश्रितश्चिदस्तु. शं नः क्षेमे शमु योगे नो अस्तु यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (८) हे अन्नस्वामी वरुण! तुम्हारे निमित्त बनाया हुआ यह स्तोत्र तुम्हारे मन में समा जाए. हमारा क्षेत्र और योग मंगलमय हो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. ebook converter DEMO Watermarks*