ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextजिस समय सूर्य ने एतश नामक राजर्षि को दुःख दिया, उस समय टेढ़े चलने वाले एवं वायु के समान तेज दौड़ने वाले घोड़ों ने अर्जुन के पुत्र कुत्स ऋषि को वहन किया था. विविध कर्म करने वाले इंद्र किरणों वाले एवं अपराजित सूर्य पर छिपकर आक्रमण करने गए थे. (११) य ऋते चिदभिश्रिषः पुरा जत्रुभ्य आतृदः. सन्धाता सन्धिं मघवा पुरूवसुरिष्कर्ता विहुतं पुनः.. (१२) इंद्र शीश कटने पर रक्त निकलने के पहले ही जोड़ने वाले द्रव्य के अभाव में भी शीश और धड़ को जोड़ देते हैं. धनवान् एवं अनेक धनों के स्वामी इंद्र अलग-अलग भागों को सुधार देते हैं. (१२) मा भूम निष्ष्ट्याइवेन्द्र त्वदरणा इव. वनानि न प्रजहितान्यद्रिवो दुरोषासो अमन्महि.. (१३) हे इंद्र! तुम्हारी कृपा से हम क्षीण, दुःखी एवं शाखाहीन वनों के समान संतानहीन न हों. हे वज्रधारी इंद्र! हम घरों में रहते हुए तुम्हारी स्तुति करें. (१३) अमन्महीदनाशवोऽनुग्रासश्च वृत्रहन्. सकृत्सु ते महता शूर राधसानु स्तोमं मुदीमहि.. (१४) हे वृत्रहंता इंद्र! हम धीरे-धीरे, उग्रतारहित एवं भक्ति व श्रद्धापूर्वक हविरूप महान् धन के साथ तुम्हारी स्तुति बोलेंगे. (१४) यदि स्तोमं मम श्रवदस्माकमिन्द्रमिन्दवः. तिरः पवित्रं ससृवांस आशवो मन्दन्तु तुग्र्यावृधः.. (१५) इंद्र यदि हमारी स्तुति सुन लें तो हमारे वक्रभाव से रखे हुए, दशापवित्र भाव द्वारा शुद्ध, एकधन नामक जल से वृद्धि को प्राप्त एवं नशीले सोमरस उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं. (१५) आ त्वाद्य सधस्तुतिं वावातुः सख्युरा गहि. उपस्तुतिर्मघोनां प्र त्वावतधा ते वश्मि सुष्टुतिम्.. (१६) हे इंद्र! अन्य लोगों के साथ की जाती हुई अपने सेवक स्तोता की स्तुति सुनकर शीघ्र उसके पास आओ. हवि धारण करने वाले अन्य स्तोताओं की स्तुतियां भी तुम्हारे पास पहुंचें. इस समय मैं तुम्हारी शोभनस्तुति की कामना करता हूं. (१६) सोता हि सोममद्रिभिरेमेनम्प्सु धावत. गव्या वस्त्रेव वासयन्त इन्जरो निर्धुक्षन्वक्षणाभ्यः.. (१७) ebook converter DEMO Watermarks*