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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1403 of 1855

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Page 1403

स सूनुर्मातरा शुचिर्जातो जाते अरोचयत्. महान्मही ऋतावृधा.. (३) उत्पन्न, शुद्ध, उत्तम हविरूप एवं पुत्र के समान सोम विस्तृत यज्ञ बढ़ाने वाली एवं माता के समान द्यावा-पृथिवी को प्रकाशित करते हैं. (३) स सप्त धीतिभिर्हितो नद्यो अजिन्वदद्रुहः. या एकमक्षि वावृधुः.. (४) नदियों ने जिन क्षीणतारहित एवं मुख्य सोम को बढ़ाया, वे सोम उंगलियों द्वारा निचुड़कर द्रोहरहित सातों नदियों को प्रसन्न करते हैं. (४) ता अभि सन्तमस्तृतं महे युवानमा दधुः. इन्दुमिन्द्र तव व्रते.. (५) हे इंद्र! तुम्हारे यज्ञ में वर्तमान एवं हिंसारहित सोम को उंगलियों ने महान् कर्म के लिए धारण किया था. (५) अभि वह्निर्मर्त्यः सप्त पश्यति वावहिः. क्रिविर्देवीरतर्पयत्.. (६) यज्ञ का भार वहन करने वाले, मरणरहित एवं देवों को अतिशय प्रसन्नता देने वाले सोम सात नदियों को देखते हैं. सोम कुएं के रूप में पूर्ण होकर नदियों को तृप्त करते हैं. (६) अवा कल्पेषु नः पुमस्तमांसि सोम योध्या. तानि पुनान जङ्घनः.. (७) हे पुरुषरूप सोम! कल्प के दिनों में हमारी रक्षा करो. हे पवमान सोम! तुम युद्ध करने योग्य राक्षसों को नष्ट करो. (७) नू नव्यसे नवीयसे सूक्ताय साधया पथः. प्रत्नवद्रोचया रुचः.. (८) हे सोम! तुम यज्ञरूपीमार्ग द्वारा हमारी नवीन एवं प्रशंसनीय स्तुतियों के समीप शीघ्र आओ एवं पहले के समान अपना प्रकाश फैलाओ. (८) पवमान महि श्रवो गामश्वं रासि वीरवत्. सना मेधां सना स्वः.. (९) हे पवमान सोम! तुम हमें संतानयुक्त एवं महान् अन्न, गाएं एवं घोड़े देते हो. तुम हमें बुद्धि दो एवं हमारे मनोरथ पूरे करो. (९) सूक्त—१० देवता—पवमान सोम प्र स्वानासो रथा इवार्वन्तो न श्रवस्यवः. सोमासो राये अक्रमुः.. (१) रथ और घोड़े के समान शब्द करने वाले निचुड़ते हुए सोम शत्रुओं का अन्न छीनने की अभिलाषा करते हुए यजमानों को धन देने के लिए आते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*