BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1411 of 1855

Read in context
Page 1411

त्वं सोम विपश्चितं तना पुनान आयुषु. अव्यो वारं वि धावसि.. (८) हे सोम! तुम मनुष्यों में स्तोता की रक्षा करते हो. तुम कपड़े से छनकर भेड़ के बालों से बने हुए दशापवित्र पर जाते हो. (८) सूक्त—१७ देवता—सोम प्र निम्नेनेव सिन्धवो घ्नन्तो वृत्राणि भूर्णयः. सोमा असृग्रमाशवः.. (१) जिस प्रकार नदियां नीचे की ओर बहती हैं, उसी प्रकार शत्रुहंता, शीघ्रगामी एवं व्याप्त सोम द्रोणकलश में जाते हैं. (१) अभि सुवानास इन्दवो वृष्ट्यः पृथिवीमिव. इन्द्रं सोमासो अक्षरन्.. (२) जिस प्रकार वर्षा धरती पर गिरती है, उसी प्रकार निचुड़ा हुआ सोमरस इंद्र को प्रसन्न करने के लिए नीचे गिरता है. (२) अत्यूर्मिर्मत्सरो मदः सोमः पवित्रे अर्षति. विघ्नन्रक्षांसि देवयुः.. (३) बड़ी-बड़ी लहरों वाले, नशीले एवं प्रमुदित सोम राक्षसों का विनाश करते हुए देवों को पाने की अभिलाषा से दशापवित्र पर जाते हैं. (३) आ कलशेषु धावति पवित्रे परि षिच्यते. उक्थैर्यज्ञेषु वर्धते.. (४) यज्ञों में सोम तेजी से कलश में जाते हैं, दशापवित्र पर डाले जाते हैं और उक्थमंत्रों के साथ बढ़ते हैं. (४) अति त्री सोम रोचना रोहन्न भ्राजसे दिवम्. इष्णन्तसूर्य न चोदयः.. (५) हे सोम! तुम तीनों लोकों का अतिक्रमण करके द्युलोक को प्रकाशित करते हो. तुम गतिशील होकर सूर्य को प्रेरित करो. (५) अभि विप्रा अनूषत मूर्ध्न्यज्ञस्य कारवः. दधानाश्चक्षसि प्रियम्.. (६) यज्ञ का अनुष्ठान करने वाले स्तोता सोम निचोड़ने वाले दिन सोम पर दृष्टि रखते हुए उनकी स्तुति करते हैं. (६) तमु त्वा वाजिनं नरो धीभिर्विप्रा अवस्यवः. मृजन्ति देवतातये.. (७) हे सोम! यज्ञ के नेता अध्वर्यु आदि अन्न की अभिलाषा करके यज्ञ के निमित्त तुम अन्नयुक्त सोम को शुद्ध करते हो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*