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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1439 of 1855

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सूक्त—५३ देवता—पवमान सोम उत्तॆ शुष्मासॊ अस्थू रक्षॊ भिन्दन्तॊ अद्रिवः. नुदस्व याः परिस्पृधः.. (१) हे पत्थरों वाले सोम! तुम्हारे वेग राक्षसों को विदीर्ण करते हुए उठते हैं. ललकारती हुई जो शत्रुसेनाएं हमें बाधा पहुंचाती हैं, तुम उन्हें नष्ट करो. (१) अया निजघ्निरोजसा रथसङ्गे धने हिते. स्तवा अबिभ्युषा हृदा.. (२) हे अपने बल से शत्रुओं को मारने वाले सोम! मैं भयरहित हृदय से इसलिए तुम्हारी स्तुति करता हूं कि तुम मेरे रथों में शत्रुओं का धन रखो. (२) अस्य व्रतानि नाधृषे पवमानस्य दूढ्या. रुज यस्त्वा पृतन्यति.. (३) हे निचोड़ते हुए सोम! तुम्हारे इस कर्म को दुष्टबुद्धि राक्षस नहीं सह सकते. जो तुमसे युद्ध करना चाहता है, उसे तुम बाधा दो. (३) तं हिन्वन्ति मदच्युतं हरिं नदीषु वाजिनम्. इन्दुमिन्द्राय मत्सरम्.. (४) ऋत्विज् नशीला रस टपकाने वाले, हरितवर्ण, शक्तिशाली एवं मादक सोम को इंद्र के लिए जल में डालते हैं. (४) सूक्त—५४ देवता—पवमान सोम अस्य प्रत्नामनु द्युतं शुक्रं दुदुहे अह्रयः. पयः सहस्रसामृषिम्.. (१) विद्वान् ऋत्विज् सोम के प्राचीन, दीप्तिशाली, उज्ज्वल, असीमित अभिलाषाओं को देने वाले एवं कर्मफल के द्रष्टा रस को दुहते हैं. (१) अयं सूर्य इवोपद्गयं सरांसि धावति. सप्त प्रवत आ दिवम्.. (२) यह सोम सूर्य के समान सारे संसार को देखते हैं, तीस उक्थ पात्रों की ओर जाते हैं एवं स्वर्ग से लेकर पृथ्वी तक सात नदियों को घेरते हैं. (२) अयं विश्वानि तिष्ठति पुनानो भुवनोपरि. सोमो देवो न सूर्यः... (३) निचोड़े जाते हुए यह सोमदेव सूर्य के समान सभी लोकों के ऊपर रहते हैं. (३) परि णो देववीतये वाजाँ अर्षसि गोमतः. पुनान इन्दविन्द्रयुः.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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