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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

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हे सोम! तुम हमारी गायों को सुख दो. तुम हमारे लिए अधिक अन्न तथा प्रशंसनीय जल बढ़ाओ. (१५) पवमानो अजीजनद्दिवश्चित्रं न तन्युतम्. ज्योतिर्वैश्वानरं बृहत्.. (१६) शुद्ध होते हुए सोम ने वैश्वानर नामक ज्योति को वज्र के समान इसलिए उत्पन्न किया था कि स्वर्ग का विस्तार हो सके. (१६) पवमानस्य ते रसो मदो राजन्नदुच्छुनः. वि वारमव्यमर्षति.. (१७) हे दीप्तिशाली सोम! जब तुम शुद्ध होते हो तो तुम्हारा राक्षसनाशक एवं मदकारक रस भेड़ के बालों से बने हुए दशापवित्र पर जाता है. (१७) पवमान रसस्तव दक्षो वि राजति द्युमान्. ज्योतिर्विश्वं स्वर्द्दशे.. (१८) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम्हारा बढ़ा हुआ एवं दीप्तिशाली रस विशेषरूप से सुशोभित होता है तथा अपने तेज से विश्व को व्याप्त करके देखने योग्य बनाता है. (१८) यस्ते मदो वरेण्यस्तेना पवस्वान्धसा. देवावीरघशंसहा.. (१९) हे सोम! तुम अपने देवाभिलाषी, राक्षसहंता, सबके वरण करने योग्य एवं नशीले रस को अन्न के साथ टपकाओ. (१९) जघ्निर्वृत्रममित्रियं सस्निर्वजं दिवेदिवे. गोषा उ अश्वसा असि.. (२०) हे सोम! तुमने शत्रु वृत्र को मारा, प्रतिदिन संग्राम में भाग लिया एवं तुम गाएं तथा घोड़े देते हो. (२०) सम्मिश्लो अरुषो भव सूपस्थाभिर्न धेनुभिः. सीदञ्छ्येनो न योनिमा.. (२१) हे शोभन स्वाद वाले गाय के दूध, दही आदि से मिले हुए सोम! तुम बाज पक्षी के समान शीघ्र अपने स्थान पर बैठते हुए सुशोभित बनो. (२१) स पवस्व य आविथेन्द्रं वृत्राय हन्तवे. वव्रिवांसं महीरपः.. (२२) हे सोम! तुमने विशाल जलों को रोकने वाले वृत्र के मारने के लिए इंद्र की रक्षा की थी. तुम इस समय नीचे गिरो. (२२) सुवीरासो वयं धना जयेम सोम मीढ्वः. पुनानो वर्ध नो गिरः.. (२३) हे सींचने वाले एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमारी स्तुतियों को बढ़ाओ. हम अंगिरागोत्रीय अमहीयु आदि ऋषि शत्रुओं के धन जीतें. (२३) ebook converter DEMO Watermarks*

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