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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

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अविन्दन्ते अतिहितं यदासीद्यज्ञस्य धाम परमं गुहा यत्. धातुर्द्युतानात्सवितुश्च विष्णोर्भरद्वाजो बृहदा चक्रे अग्नेः.. (२) धाता आदि ने छिपा हुआ, हव्य का संस्कार करने वाला व गुफा में सुरक्षित साममंत्र पाया. भरद्वाज ऋषि धाता, दीप्तिशाली सविता, विष्णु और अग्नि के पास से उस बृहत् साममंत्र को लाए. (२) तेऽविन्दन्मनसा दीध्याना यजुः ष्फन्नं प्रथमं देवयानम्. धातुर्द्युतानात्सवितुश्च विष्णोरा सूर्याद्भरन्घर्ममेते.. (३) धाता आदि ने ध्यान करते हुए मन में यज्ञसाधक, अभिषेकक्रिया संपन्न करने वाले, मुख्य एवं देवों को प्राप्त करने के साधन उस धर्ममंत्र को पाया. पुरोहितों ने धाता, तेजस्वी सविता, विष्णु और सूर्य से इस मंत्र को प्राप्त किया. (३) सूक्त—१८२ देवता—बृहस्पति बृहस्पतिर्नयतु दुर्गहा तिरः पुनर्नेषदघशंसाय मन्म. क्षिपदशस्तिमप दुर्मतिं हन्नथा करद्यजमानाय शं योः.. (१) दुर्दशा को नष्ट करने वाले बृहस्पति हमारे पापों को नष्ट करें व हमारा अनर्थ चाहने वाले व्यक्ति के ऊपर आयुध उठावें. वे शत्रु का नाश करें, दुर्बुद्धि का नाश करें एवं यजमान को रोग से बचाकर निर्भय करें. (१) नराशंसो नोऽवतु प्रयाजे शं नो अस्त्वनुयाजो हवेषु. क्षिपदशस्तिमप दुर्मतिं हन्नथा करद्यजमानाय शं योः.. (२) पांच प्रयाजों में नराशंस अग्नि हमारी रक्षा करें. आह्वानाें में अनुयाज हमारी रक्षा करें. वे शत्रु का नाश करें, दुर्बुद्धि को मिटावें एवं यजमान को रोग से बचाकर निर्भय करें. (२) तपुर्मूर्धा तपतु रक्षसो ये ब्रह्मद्विषः शरवे हन्तवा उ. क्षिपदशस्तिमप दुर्मतिं हन्नथा करद्यजमानाय शं योः.. (३) जो स्तोत्रों से द्वेष करने वाले राक्षस हैं, उन्हें हिंसक असुरों के नाश हेतु तप्त शिर वाले बृहस्पति कष्ट दें. वे अमंगल का नाश करें, दुर्बुद्धि को मिटावें एवं यजमान को रोगमुक्त करके निर्भय बनावें. (३) सूक्त—१८३ देवता—यजमान और उसकी पत्नी ebook converter DEMO Watermarks*