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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 197 of 1855

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Page 197

यच्चिद्धि त्वं गृहेगृह उलूखलक युज्यसे. इह द्युमत्तमं वद जयतामिव दुन्दुभिः.. (५) हे ऊखल! यद्यपि घर-घर में तुम्हारा प्रयोग किया जाता है, पर इस यज्ञ में तुम उसी प्रकार ध्वनि करते हो, जिस प्रकार विजयी लोग दुंदुभी बजाते हैं. (५) उत स्म ते वनस्पते वातो वि वात्यग्रमित्. अथो इन्द्राय पातवे सुनु सोममुलूखल.. (६) हे ऊखल रूप काष्ठ! तुम्हारे ही सामने होकर हवा चलती है, इसलिए हे ऊखल! इंद्र देवता के पान के लिए सोमरस तैयार करो. (६) आयजी वाजसातमा ता ह्यु१च्चा विजर्भृतः. हरी इवान्धांसि बप्सता.. (७) हे ऊखल और मूसल! तुम दोनों सभी प्रकार यज्ञ के साधन एवं प्रभूत अन्न देने वाले हो. जिस प्रकार इंद्र के दोनों घोड़े अपना खाद्य चना आदि चबाते समय ध्वनि करते हैं, उसी प्रकार तुम भी तुमुल ध्वनि के साथ परस्पर प्रहार करते हो. (७) ता नो अद्य वनस्पती ऋष्वावृष्वेभिः सोतृभिः. इन्द्राय मधुमत्सुतम्.. (८) हे ऊखल और मूसल रूप दोनों काष्ठो! तुम दोनों देखने में परम सुंदर हो. शोभन अभिनव मंत्रों के सहयोग से तुम दोनों इंद्र के लिए मधुर सोमरस तैयार करो. (८) उच्छिष्टं चम्वोर्भर सोमं पवित्र आ सृज. नि धेहि गोरधि त्वचि.. (९) सोमरस निचोड़ने वाले फलकों से बचे हुए सोम को उठाकर पवित्र कुशों के ऊपर रखो. इसके बाद उसे गोचर्म से बनाए हुए पात्र में रखो. (९) सूक्त—२९ देवता—इंद्र यच्चिद्धि सत्य सोमपा अनाशस्ता इव स्मसि. आ तू न इन्द्र शंसय गोष्वश्वेषु शुभ्रिषु सहस्रेषु तुवीमघ.. (१) हे इंद्र! तुम सोमपानकर्त्ता एवं सत्यवादी हो. हम कोई प्रसिद्ध व्यक्ति नहीं हैं. हे अनंत धनशाली इंद्र! हमें सुंदर और अगणित गायों और अश्वों द्वारा उत्तम धनवान् बनाओ. (१) शिप्रिन्वाजानां पते शचीवस्तव दंसना. आ तू न इन्द्र शंसय गोष्वश्वेषु शुभ्रिषु सहस्रेषु तुवीमघ.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*