Skip to content
BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 213 of 1855

Read in context
Page 213

ह्वयाम्यग्निं प्रथमं स्वस्तये ह्वयामि मित्रावरुणाविहावसे. ह्वयामि रात्रीं जगतो निवेशनीं ह्वयामि देवं सवितारमूतये.. (१) मैं अपनी रक्षा के लिए सबसे पहले अग्नि को बुलाता हूं. मैं अपनी रक्षा के लिए मित्र और वरुण को यहां बुलाता हूं. मैं संसार के सभी प्राणियों को विश्राम देने वाली रात को बुलाता हूं. मैं अपनी रक्षा के लिए सविता को बुलाता हूं. (१) आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च. हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्.. (२) सविता का रथ सोने का है. वे अंधकार से भरे आकाश में बार-बार भ्रमण करते हुए देवों और मानवों को अपने-अपने कर्मों में लगाते हुए सभी लोकों की यात्रा करते हैं. (२) याति देवः प्रवता यात्युद्वता याति शुभ्राभ्यां यजतो हरिभ्याम्. आ देवो याति सविता परावतोऽप विश्वा दुरिता बाधमानः.. (३) सविता देव प्रातःकाल से मध्याह्न तक उन्नत मार्ग से और मध्याह्न से संध्या तक अवनत मार्ग से चलते हैं. यज्ञ के योग्य सूर्य देव सफेद घोड़ों की सहायता से चलते हैं. वे समस्त पापों का नाश करते हुए दूर देश से यज्ञ में आते हैं. (३) अभीवृतं कृशनैर्विश्वरूपं हिरण्यशम्यं यजतो बृहन्तम्. आस्थद्रथं सविता चित्रभानुः कृष्णा रजांसि तविषिं दधानः.. (४) यज्ञ के योग्य एवं रंग-बिरंगी किरणों वाले सविता अपने तेज से लोकों में व्याप्त अंधकार को नष्ट करने के लिए स्वर्ण मूर्तियों से सुशोभित एवं सोने की कीलों वाले विशाल रथ पर सवार हुए. (४) वि जनाञ्छ्यावाः शितिपादो अख्यन्रथं हिरण्यप्रउगं वहन्तः. शश्वद्विशः सवितुर्देवस्योपस्थे विश्वा भुवनानि तस्थुः.. (५) सूर्य के सफेद पैरों वाले घोड़े सोने के जुए वाले रथ को खींचते हुए मनुष्यों को विशेष रूप से प्रकाश देते हैं. मनुष्य एवं सारा संसार प्रकाश के लिए सूर्य देवता के समीप जाता है. (५) तिस्रो द्यावः सवितुर्द्वा उपस्थाँ एका यमस्य भुवने विराषाट्. आणिं न रथ्यममृताधि तस्थुरिह ब्रवीतु य उ तच्चिकेतत्.. (६) स्वर्ग आदि तीन लोक हैं. इनमें स्वर्गलोक और भूलोक दो सूर्य के अधिकार में हैं. एक आकाशलोक यमराज के घर जाने का मार्ग है. जिस प्रकार आणि नाम की कील के ऊपर रथ टिका रहता है, उसी प्रकार चंद्रमा आदि नक्षत्र सूर्य का सहारा लिए हुए हैं. जो सूर्य के विषय ebook converter DEMO Watermarks*