ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextइन्द्राग्नी युवामिमे३भि स्तोमा अनूषत:. पिबतं शम्भुवा सुतम्.. (७) हे इंद्र एवं अग्नि! ये स्तोता तुम्हारी प्रशंसा करते हैं. हे सुख देने वाले इंद्र एवं अग्नि! इस सोमरस को पिओ. (७) या वां सन्ति पुरुस्पृहो नियुतो दाशुषे नरा. इन्द्राग्नी ताभिरा गतम्.. (८) हे इंद्र एवं अग्नि! तुम अपने उन घोड़ों पर सवार होकर आओ, जो बहुत लोगों द्वारा अभिलषित हैं एवं हव्य देने वाले यजमानों के लिए जन्मे हैं. (८) ताभिरा गच्छतं नरोपेदं सवनं सुतम्. इन्द्राग्नी सोमपीतये.. (९) हे इंद्र एवं अग्नि! इस यज्ञ में निचोड़े गए सोमरस को पीने के लिए तुम नियुतों के साथ आओ. (९) तमीळिष्व यो अर्चिषा वना विश्वा परिष्वजत्. कृष्णा कृणोति जिह्वया.. (१०) हे स्तोता! उन अग्नि की स्तुति करो जो अपनी लपटों से सभी वनों को घेर लेते हैं एवं अपनी जीभ से उन्हें काला कर देते हैं. (१०) य इच्छ आविवासति सुम्नमिन्द्रस्य मर्त्य:. द्युम्नाय सुतरा अप:.. (११) जो मनुष्य प्रज्वलित अग्नि में इंद्र के लक्ष्य से सुखदायक हवि देता है, इंद्र उसके अन्नोत्पादन के लिए शोभन जल बरसाते हैं. (११) ता नो वाजवतीरिष आशून्निपृतमर्वतः. इन्द्रमग्निं च वोळ्हवे.. (१२) हे इंद्र एवं अग्नि! हमें शक्तिशाली अन्न एवं तेज चलने वाले घोड़े दो, जिससे हम तुम्हें हव्य पहुंचा सकें. (१२) उभा वामिन्द्राग्नी आहुवध्या उभा राधसः सह मादयध्यै. उभा दाताराविषां रयीणामुभा वाजस्य सातये हुवे वाम्.. (१३) हे इंद्र एवं अग्नि! मैं विशेषरूप से तुम्हारा हवन करने के लिए, हव्य द्वारा प्रसन्न करने के लिए एवं अन्न पाने के लिए तुम्हें बुलाता हूं. तुम अन्न एवं धन देने वाले हो. (१३) आ नो गव्येभिरश्व्यैर्वसव्यै३ रुप गच्छतम्. सखायौ देवौ सख्याय शम्भुवेन्द्राग्नी ता हवामहे.. (१४) हे इंद्र एवं अग्नि! तुम गायों, घोड़ों एवं धनों के साथ हमारे पास आओ. हम इंद्र एवं अग्नि देवों को मित्रता तथा सुख के लिए बुलाते हैं. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*