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साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

by महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल)

Source: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (origin)

DevanagariHindipublished424 pages

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१४ | श्रीसाम्बपुराणम्

पूर्व में इस कामदेव के समान युवक को नहीं देखा था, वे सभी साम्ब को देखकर विक्षुब्ध हो गयीं।।३४-३६।।

मद्यदोषात्ततस्तासां स्मृतिलोपात्तथैव च।
योषितामल्पसत्त्वानां योन्यः शीघ्रं प्रसुस्रुवुः ॥३७॥

मद्यपान के दोष से उनका स्मृतिलोप हो गया था। उन सभी अल्पसत्त्व स्त्रीगण की योनि शीघ्र ही गीली हो गयी।।३७।।

श्रूयते चाप्ययं श्लोकः पुराणे पठते यथा।
ब्रह्मचर्येऽपि वर्त्तन्त्यः साध्व्यो ह्यपि तथा शृणु ॥३८॥
दृश्यं तु पुरुषं दृष्ट्वा योनिः प्रक्लिद्यते स्त्रियः।
लोके च श्रूयते ह्येतन्मद्यस्यातिप्रसेवनात् ॥३९॥
लज्जां मुञ्चन्ति ह्रीमत्यो नार्यः सत्कुलजा अपि।

ऐसा श्लोक सुना जाता है कि ब्रह्मचर्य में विद्यमान (ब्रह्मचारिणी) स्त्रीगण के भी सम्बन्ध में सुनो—रम्य दर्शन पुरुष को देखकर स्त्रीगण की योनि प्रक्लिन्न हो जाती है। लोक में भी सुना जाता है कि अत्यन्त मद्यसेवन से सत्कुल में उत्पन्न लज्जावान रमणीगण भी लज्जा छोड़ देती हैं।।३८-३९।।

समांसैर्भोजनैः स्निग्धैस्तथा मधुसुरासवैः।
गन्धैर्मनोज्ञैर्वस्त्रैश्च कामः स्त्रीषु विजृम्भते ॥४०॥
एतद्बुद्ध्वा कुलस्त्रीणां श्रेयः परममिच्छता।
मद्यं न देयमल्पं वा पुरुषेण विपश्चिता ॥४१॥

इस प्रकार मांस-भोजन, मधु-सुरा-आसवपान, सुगन्ध द्रव्य तथा मनोज्ञ वस्त्र से स्त्रीगण का कामभाव प्रकाशित होता है। अतः यह समझकर मंगलकामी विज्ञजन की कुलस्त्रीगण को अत्यल्प मद्य भी देना उचित नहीं है।।४०-४१।।

वशिष्ठ उवाच
नारदोऽप्यथ तं साम्बं प्रेषयित्वा त्वरान्वितः।
आजगामाथ तत्रैव साम्बस्यानुपदेन तु ॥४२॥
आयान्तं तमभिप्रेक्ष्य गुरुं देवर्षिसत्तमम्।
सहसैवोत्थिताः सर्वाः स्त्रियस्ता मदविह्वलाः ॥४३॥

ऋषि वशिष्ठ देव कहते हैं—तदनन्तर नारद भी साम्ब को वहाँ जाने के लिये प्रेरित करके साम्ब के पीछे-पीछे वहीं पहुँच गये। गुरु देवर्षि नारद को आया देखकर मदविह्वल युवतीगण सहसा उठकर खड़ी हो गयीं।।४२-४३।।