साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
by महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल)
Source: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (origin)
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Read in contextपञ्चदशोऽध्यायः
(ब्रह्मकृतस्तोत्रम्)
साम्ब उवाच
शरीरलिखनं भानोः कथं वै कति वादितः।
देवैर्वा ऋषिभिर्वापि तन्ममाख्यातुमर्हसि ॥१॥
साम्ब कहते हैं कि सूर्य का यह शरीर-लेखन (शरीर का अङ्कन, प्रचण्ड उग्र तापमय शरीर का संक्षेपीकरण) किसलिये, कितने प्रकार से, किंवा देवता अथवा ऋषि द्वारा कहा गया है, वह कहिये॥१॥
नारद उवाच
ब्रह्मलोके सुखासीनं ब्रह्माणं ससुरासुरम्।
ऋषयश्चोपसङ्गम्य इदमूचुः समाहिताः ॥२॥
नारद कहते हैं—ब्रह्मलोक में देवता तथा असुरों के साथ सुखपूर्वक बैठे ब्रह्मा के निकट उपस्थित होकर ऋषियों ने समाहित चित्त से इस प्रकार कहा॥२॥
भगवन्नदितेः पुत्रो य एष दिवि राजते।
मार्तण्ड इति विख्यातस्तिग्मतेजो महातपाः ॥३॥
अस्य तेजोभिरखिलं जगत् स्थावरजङ्गमम्।
क्लिश्यमानमनाक्रन्दमुपेक्षसि कथं प्रभो ॥४॥
हे भगवन्! अदिति के पुत्र जो द्युलोक में विराजित हैं, जो मार्तण्ड कहलाते हैं, जो प्रचण्ड किरणों वाले तथा महातपस्वी हैं, उनके तेज से अखिल स्थावर-जंगम विश्व क्लिष्ट होकर चित्कार कर रहा है। हे प्रभु! आप क्यों उपेक्षा कर रहे हैं॥३-४॥
वयमप्याहिताशङ्कास्तेजसा सम्प्रमोहिताः।
दिवि भुव्यन्तरिक्षे च शर्म नोपलभामहे ॥५॥
हम भी भीत-त्रस्त हैं, तेज से सम्यक् रूपेण विमोहित होकर द्युलोक, भूलोक तथा अन्तरिक्ष लोक में कहीं भी कल्याण नहीं पा रहे हैं॥५॥
एवमुक्तस्तु भगवानुवाच कमलासनः।
तमेव शरणं देवं गच्छामः सहितं वयम् ॥६॥