संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextगर्भ न रहनेके कारण
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ऐसी दशामे जखम होनेके कारण पुरुष-समागम करनेमें बड़ा दुःख होता है। जो स्त्रियाँ संयोग करती हैं, उनके भीतरी अवयव नष्ट हो जाते हैं। बड़े हुए उपदंशमें भीतरी अवयवचतक सड़ते और गलते हुए देखे गए हैं।
इसमें सबसे बड़ी बात तो यह होती है कि स्त्रीका रज नष्ट हो जाता है। और इस कारण रज-कीट निकम्मे पड़ जाने हैं। परियाम यह होता है कि सन्तान नहीं होती।
(२३) गर्भ न रहनेके कारण ।
हम लोग ऐसी अवस्थामें हैं कि जिसमें इस बातका निश्चय बहुत कठिनाईसे कर सकते हैं कि हमारी स्त्रियाँ जो अच्छी तरहसे हैं, जिनको हम निरोग समझते हैं, उनके सन्तान क्यों नहीं होती? इसका कारण यह है कि हम अनेक मतोंको माननेवाले हैं। इसलिये हमारे हृदयमें यह बात बहुत कम जमती है। हम लोग यह नहीं देखते कि स्त्रीको किन कारणों से सन्तान नहीं होता। जहाँ चार पाँच वर्ष व्यतीत हुए और कोई बच्चा न हुआ, स्त्रियाँ तुरंत भूत-प्रेत या पीर पैगम्बरोंका विचार करने लगती हैं। स्त्रियाँ ही नहीं, पुरुष भी इस अंध-विश्वासके वशमें देखे जाते हैं। इसको छोड़िये, सबसे बड़ी बात तो यह है कि वैद्य कहते हैं कुछ डाक्टर साहबकी दूसरी ही राय है। हुकीम साहबके डेढ़ चावलकी खिचड़ी अलग ही एकती है। ऐसी दशामें गरजसे बावला एक गरीब भारतीय किसी एक बात पर अपने चित्तको कैसे ठहरा सकता है? अन्तमें भाग्य भगवान्के भरोसे यही मान लेता है कि स्त्री वन्ध्या है। कैसे शोककी बात है कि जरासे फेरफार के