संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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सन्तति-शास्त्र ।
दहिना अण्ड खराब हुआ तो कन्या ही कन्याएँ हुईं। इससे साफ जाहिर है कि स्त्री और पुरुषके दहिने अण्डोंमें पुत्र और बाएँमें कन्याका रज वीर्य रहता है।
अब हम पाठकोंको यह दिखलायेंगे कि हम इस विषयमें जितने मत लिख चुके हैं वे सब हमारे माने हुए मतसे मिलते हैं या नहीं। इनमें एक एक मत पर विचार करनेकी आवश्यकता है।
१ वेद, धर्मशास्त्र, बौद्ध और यूनानी मतसे यह बात कही जाती है कि वीर्य बलवान होनेसे पुत्र और रज बली होनेसे कन्या उत्पन्न होती है। अब यह देखना चाहिये कि रज और वीर्य बलवान कब होता है। इस विषयमें एक विद्वानकी राय है कि पुरुषके दहिने और स्त्रीके बाएँ अङ्गने निकला वीर्य और रज प्रबल होता है।
( रतिशान्त )
इमने इस बातको माना कि पुरुषके प्रधान दहिने अङ्गसे वीर्य निकल कर स्त्रीके दहिने अङ्गसे निकले रजसे मिलकर पुत्र और स्त्रीके प्रधान बाएँ अङ्गसे निकला रज पुरुषके बाएँ अङ्गसे निकले वीर्यसे मिल कर कन्या उत्पन्न करता है। हमरे मतसे ऊपर कहे हुए यह मत कि “बलवान् वीर्यसे पुत्र और बली रजसे कन्या उत्पन्न होती है” इस कारण मिलता है कि पुरुषके दहिने अङ्ग अर्थात् दहिने अण्डसे निकला हुआ बलवान् वीर्य स्त्रीके दहिने अण्डसे निकले निर्बल रजके साथ मिलकर पुत्र और स्त्रीके बाएँ अण्डसे निकला बली रज पुरुषके बाएँ अण्डसे निकले निर्बल वीर्यसे मिलकर कन्या उत्पन्न करता है अतएव हमारे माने हुए मतसे यह सिद्धान्त पूरा मिलता है।