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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

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सन्तति-शास्त्र ।

२. विद्वानोंकी राय ।

१. जब गर्भ धारण होता है तब ज्योंही रज-वीर्य मिलकर गर्भाशयमें पहुँचता है त्यों ही खींची नाभिके नीचे थोडासा मीठा मीठा दर्द होता है । (रति शास्त्र )

१. गर्भ धारण समयमें वीर्य योनिसे बाहर नहीं निकलता और गर्भ धारण होते ही संयोगकी चाह जाती रहती है । (चक्रपाणि )

जब ऐसे लक्षण हों, तो समझ लेना चाहिये कि गर्भ धारण हो गया । ये लक्षण गर्भ धारण होनेके साथ ही साथ मालूम होते हैं ।

(३१) जीव गर्भमें कब आता है ?

इस विषयमें कि गर्भ समयमें वचोमें जीव कब आता है अनेक विवाद हैं । कोई गर्भ धारण होनेके साथ ही, कोई चार मास के बाद, कोई चैतन्यता उत्पन्न होनेपर जीवका गर्भमें आना मानते हैं । इसी प्रकार अनेक मत हैं, परन्तु यदि यह बात मान ली जाय कि गर्भ धारण होनेके साथ ही साथ जीव नहीं आता, तो यहाँ एक बहुत बड़ी शंका यह होगी कि गर्भ फिर बढ़ता कैसे है ? क्योंकि निर्जीव पदार्थका वृद्धि-क्रम नहीं होता इसलिये यह बात माननी पड़ेगी कि सजीव गर्भाधान होता है या गर्भाधान होनेके साथ ही साथ गर्भ सजीव हो जाता है ।

१. वैदिक मत

१. गर्भाधानसे लेकर दस मास अर्थात् पैदा होनेतक गर्भ सजीव रहता है और सजीव ही उत्पन्न होता है ।

(क० म० ५ सू० ७८ म० ९ )