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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

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सन्तति-शास्त्र ।

जातिकी प्रेमी होती है। इसका कारण यह है कि गर्भाधान समयमें स्त्री जातिको पुरुष जाति और पुरुष जातिको स्त्री जातिसे प्रेम अवश्य होता है और इसी प्रेमके कारण सन्तानमें पैसे प्रेमका स्थान प्रबल हो जाता है। इसलिये हर स्त्री जाति पुरुष जाति और हर पुरुष जाति स्त्री जातिसे प्रेम करती है और दोनों एक दूसरेके प्रेमी होते हैं। सच्चा प्रेम विजलीसे भी अधिक वलवान् है। जब स्त्री-पुरुष एक दूसरेके प्रेमी होते हैं, तो उनमें कुछ प्रेमकी गहराई मालूम होती है। दोनोंमें एक दूसरेके चित्तको खींचनेकी शक्ति इतनी प्रबल होती है कि दोनोंकी आत्मा एक हो जाती है, इसीलिये 'दो शरीर और एक प्राणकी' कहावत प्रसिद्ध है।

प्रेमसे शरीरमें एक प्रकारकी शक्ति पैदा होती है। जिस प्रकार विजलीके नारको हाथमें लेनेसे उसकी शक्तिका कुछ ज्ञान होता है, इसी प्रकार प्रेमके फलसे जकड़े हुए प्रेमियोंके शरीरमें प्रेमकी शक्तिका प्रवाह चिन्तवन मावसे ही उमड़ पड़ता है। एक दूसरेकी प्रेममर्तिको देखते ही शरीरमें प्रेम-शक्तिका सञ्चार हो जाता है। एक दूसरेके प्रेममें लीन हुए स्त्री पुरुषोंके देखनेसे प्रेम और प्रेमीकी मर्यादा मालूम होती है। सच्चा प्रेम उनके हृदयको इतना कोमल बना देता है कि एक दूसरेके प्रति पात्र हो जाते हैं और प्रेमशक्ति उनके हृदयको पवित्र बना देती है। प्रेमीको प्रेमानन्दके सामने स्वर्गके सुख और रंजा महाराजोंके महलोंके वैभव तिनके समान जान पड़ते हैं।

प्रेम केवल प्रेम हीके लिये किया जाता है, इसका और कोई मतलब नहीं है। सच्चा प्रेम स्त्री और पुरुषके मनको एक कर देता है, विचारोंको मिला देता है और भावोंको एक करनेके

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