संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
Page 187 of 302
Read in context२६६
सन्तति-शास्त्र ।
सुन्दर स्त्रीसे संयोगकी प्रार्थना की परन्तु उसने स्वीकार नहीं किया। अन्तमें हवशीको अपनी व्याही स्त्रीसे सन्तुष्ट होना पड़ा। उसी दिन गर्भ रह गया। मातापिता दोनोंके काले होनेपर गोरे रंगकी सन्तान उत्पन्न हुई। कारण यह था कि पिताका चित्त गोरे रंगकी स्त्रीपर था और गर्भाधान समयमें भी वह उसीका ध्यान करता रहा।
१ एक यूरोपियन स्त्रीके कमरेमें ठीक पलकके सामने एक हवशीका चित्र लगा हुआ था। वह उसको नित्य देखा करती थी। गर्भ रह गया। गर्भांचक्षामें भी स्त्री उस चित्रको देखती रही। सन्तान उत्पन्न हुई तो उसका रङ्ग काला था। माता पिता गोरे रङ्गके थे और सन्तान काली हुई। इन दोनोंको इस बातका बड़ा शोक रहा और अनेक डाकूरीसे इस बातको उन्होंने कहा। एक डाकूरेने जाँच की तो यह पता लगा कि जिस हवशीके काले चित्रको स्त्री रोज देखती थी, उसके मनपर उसका इतना प्रभाव पड़ा कि बच्चा काले रङ्गका उत्पन्न हुआ।
३ रोम देशमें एक प्रतिष्ठित मनुष्य कुरूप और छोटे डीलका था। उसकी स्त्री सुन्दर और अच्छे कदकी थी। इनसे सन्तान हुई वह पिता सरीखी थी। मातापिताको यह चिन्ता हुई कि कहाँ ऐसा न हो कि सारी सन्तानें इसी प्रकारकी हों। अनेक डाकूरीसे सम्मति ली गई। एक डाकूरेने यह कहा कि स्त्रीका चित्त लम्बे और खूब-सुरत मनुष्योंपर होना चाहिये। इस विचारसे उसने तीन अत्यन्त सुन्दर पुतले बनवाकर अपने कमरेमें रखे। स्त्रीकी निगाह हर समय उन पुतलोंपर ही पड़ती थी।