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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

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सन्तति-शास्त्र ।

२ सात दिनेके बाद गर्भकफकीसी गाँठके समान (कलस ) हो जाता है । ( वा० श० अ० १ श्लो० ३७ )

३ दूसरे सप्ताहके अन्तमें आकर १ ईश और वजन ई रत्तीके बराबर लोग मानते हैं ।

४, गर्भका तीसरा सप्ताह ।

१ इस समयमें गर्भका वजन चार गेहूँके दानेके बराबर और आकार जूएँके सामान होता है । ( १० क० )

१ इस समयमें सर तथा पैरका आकार बनने लगता है । लम्बाई ई इक्षतक वह जाती है ।

५, गर्भका चौथा सप्ताह ।

२. ऐसे समयमें गर्भ एक बड़ी भक्कीके समान होता है और आकार एक कीड़ेके सहस देहा, लम्बाई ई इक्ष, मस्तक कुछ उभरता जान पड़ता है ।

३. पहले महीनेमें गर्भ एक लोथड़ा सरीखा होता है । ( सु० श० अ० ३ श्लो० १७ )

६, गर्भका पाँचवाँ सप्ताह ।

१ इस समयमें सर और पैरोंकी ओर कुछ उभार सा मालूम होने लगता है ।

२. ऐसे समयमें गर्भ घन पिंड और अर्द्धके समान हो जाना है ।

७, गर्भका छठा सप्ताह । १ इस समयमें शरीरस सर बड़ा होता है । हाथ पैर दूठे- के समान होते हैं । अरिब, कान, नाक और मुँहके स्थान ( च० श० अ० ४ श्लो० ८ )