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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

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सन्तति-शास्त्र ।

स्थित धातु भोजन, चिन्तवन और दृष्टिसे उसीके अनुसार उत्तेजित हो तेज धातुसे मिलकर सन्तान उत्पन्न करती है ।

यहां पर एक बहुत बड़ी शंका यह होती है कि यूरोपमें सब गोरे ही रंगके क्यों पैदा होते हैं? इस विषयमें जहांतक निश्चय किया गया यह बात पायी गयी है कि सर्दीके कारण यूरोपके लोगोंमें तेज धातु अधिकांश जलयुक्त होती है । इस कारण लोग गोरे रंगके उत्पन्न होते हैं । हमारे देशमें ही जहां सर्दी अधिक पड़ती है वहांके लोग इसी कारण कुछ गोरे होते हैं । इसी प्रकार जहां गर्मी अधिक पड़ती है, वहांके लोगोंमें तेज धातुके साथ पृथ्वी और आकाश धातु अधिक होती है । इस कारण वहांपर काले रंगके लोग होते हैं । खानेके पदार्थोंमें भी बड़ा हेरफेर हो जाता है । सर्द देशमें खानेकी चीजें सर्दीसे अधिक जलयुक्त होती हैं । गर्म देशोंमें खानेके पदार्थ अधिक पृथ्वी धातुके अंशोंसे युक्त रहते हैं । शुद्ध लोगोंमें कि जिनको सुखसे खाने पीनेको मिलता है, उनके वच्चोंकी रंगत कुछ और ही होती है । इन सब विचारोंसे यह बात निश्चय है कि हर देशके खाने पीनेकी चीजोंमें पंचतत्वोंकी कमी-चेशी जरूर होती है । यह भी प्रत्येक प्रान्तके निवासियोंके रंगमें अन्तर होनेका एक विशेष कारण है ।

देश और प्रान्तका यदि विचार करके एक एक घरमें देखा जाय तो मालूम होगा कि संयमके साथ भोजन करने-वालों और लापरवाहीसे बिना विचारके भोजन करनेवालोंकी सन्तानोंमें कितना अन्तर होता है । इन सब विचारोंसे यह बात सिद्ध हुई कि तेज धातुके साथ जल इत्यादि दूसरी धातु अधिकांशसे मिलकर अनेक रूप रंगकी सन्तान उत्पन्न करती है । यह बात मुख्य करके मानी गई है कि भोजनका प्रभाव