संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextतत्काल बच्चा जननेवाली स्त्रीके लक्षण ।
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तो देखा ही नहीं गया कि वर्षोंमें हो । परंतु आचार्योंके लिखने का प्रयोजन यह है कि ऐसा हो सकता है ।
(५८) तत्काल बच्चा जननेवाली स्त्रीके लक्षण
बच्चा पैदा होनेका समय कितना कठिन होता है ? ऐसे समयमें स्त्रियाँ ही रक्षा करनेवाली होती हैं । इसलिये यह मालूम करना कितना जरूरी है कि बच्चा कब पैदा होगा ? इस विषयमें अनेक मत हैं ।
१० वैद्यकका मत ।
१. स्त्रीका कुम्हला जाना, शरीरमें भारीपन, मुखऔर नेत्रों, में शिथिलता, वक्षस्थलका वंघन खुला जान पड़ना, कूप का मुँह नीचेकी ओर हो जाना, नीचेके आधे देहमें अधिक भारीपन, वंक्षण, बस्ती, कमर, पसली और पीठमें चर्चकियोंका चलना अन्मसे अरुचि हो जाती है और गर्भका जल गिरने लगता है । तुरंत ही ऐसे लक्षणोंसे जान लेना चाहिये कि बच्चा शीघ्र ही होनेवाला है । ( ३० श० अ० ८ श्लो० ८० ) सुश्रुत० श० अ० १० श्लो० १३ व १४ और वा० श० अ० १ श्लो० ७४ व ७५ में भी ऐसा ही कहा है ।
२. योनिसे गर्भका जल गिरनेके पीछे ही प्रसवका देर्द उत्पन्न हो जाता है । (रतिशास्त्र )
ये लक्षण विशेष रीतिसे उन्हीं स्त्रियोंमें पाए जावेंगे कि जिनके पहले पहल बच्चा होगा । कई बार बच्चा हो जानेवाली स्त्रियोंमें प्रायः सब लक्षण नहीं होते हैं । परंतु कुछ होते अवश्य हैं ।