संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextवच्चकेी पैठाइशके समयका कर्तव्य ।
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आदमियोंके खड़े होनेपर श्वांस रुकने लगती है, ऐसा मकान खियाँ खास तौरसे वच्चा जानानेके लिये रखती हैं ।
कैसे शोककी बात है कि आज भारतकी वे देवियाँ कि जो लक्ष्मीस्वरूपा हैं, जिनको अमूल्य रत्न उत्पन्न करना है, जिनको अपने प्रसवसे संसारको कायम रखना है, उन्हें ऐसी धृणित जगह वच्चा जाननेके लिये दी जाती है !
यही नहीं, खास इसी समयके लिये हमारे भारतीय गृहस्योंके यहाँ एक टूटी और छोटी चारपाई अवश्य होती है कि जिसमे खटमलोंका तो ठिकाना ही नहीं, असंख्य जीव भरे रहते हैं । यह कितनी बुरी बात है । ऐसी चारपाईसे तुरन्त छूतका असर दौड पड़ता है । ध्यान रहे कि चारपाई नई और नए बाधसे बुनी होनी चाहिये कि जिसमें जरा भी भोल न हो । इससे प्रसूताके पेट और गर्भाशयपर दवाव पड़ता है ।
ओढ़ने और विछानेके कपडोंका भी निराला ही हाल होता है । इस विचारसे कि प्रसूताके कपड़े फिर काममें नहीं आते, अतएव ऐसे रद्दी बदबूदार और पुराने कपड़े ओढ़नेको दिए जाते हैं कि जिनके ओढ़ने विछानेसे अवश्य निरोग मनुष्य रोगी हो सकता है । गरमीके दिनोंमें एक दरी ओढ़नेकी जरूरत ही क्या है ? जाड़ेमें एक दरी और ओढ़नेको एक कमल बहुत है । हा ! भारतमें कैसी बुद्धिमानी फैल रही है, कैसे मौकेपर धन बचाया जाता है ? विचार करनेकी बात है, कि जिस स्त्रीके शरीर से वर्षोंका जोड़ा हुआ रक्त गिरा है, जिसने बच्चा पैदा करके दूसरा जन्म पाया है, उसके लिये ऐसे ओढ़ने और विछौने ! याद रहे कि जितना विछौना जाड़ोमें आम तौरसे होता है उतना गरमियोंमें और इससे दूना जाड़ेमें