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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

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स्तनोंके रोग ।

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जब ऐसे दाने पड़कर फूटते हैं तो जहाँ वह पानी लगता है वहाँ वैसे ही दाने पड़ जाते हैं ।

७ स्तनोंका वदना । इसके कई कारण हैं ।

१. गर्भाशयके विकारसे ।

२. ऐसे भोजनसे कि जिससे चरबी अधिक बनती है ।

ऐसी दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।

१ स्तनोंमें दूधका अधिक आना ।

२. थोड़ी थड़ीसी सरसराहट मालूम होती है ।

३. स्तनों का मोटा हो जाना ।

जब ऐसा होता है तो स्तन बढ़ते चले जाते हैं, परन्तु यह रोग उसी समय होता है जब कि बच्चा पीता हो या गर्भ हो । ये इतने बढ़ जाते हैं कि स्वयं स्त्रिको दुःख होने लगता है । चलवान् स्त्रियोंमें अधिक पाया जाता है । प्रायः देखा गया है कि स्तन इतने बढ़ जाते हैं कि पीठके पीछे बैठकर बगलसे लेजाकर बच्चे पीते है यह रोग रडियोंमें प्रायः होता है ।

८. स्तनकी कठोरता—इसके कई कारण हैं ।

१ जो माताएँ अपने वदन और स्तनोंको सुन्दर सुडौल बनाये रहनेके कारण दूध रहते हुए बच्चोंको नहीं पिलातीं उनकी छातियोंमें दूध सूखकर स्तन कठोर हो जाते हैं ।

२. दूध न होता और स्तनका छोटा होना ।

ऐसी दशामें कई लक्षण होने हैं ।

१. स्तन कड़ा पड़ जाता है और दूध नहीं आता ।

२. टटोलनेसे स्तनमें गिलदियाँ आपसमें जकड़ी सी मालूम होती हैं और भिटनी छोटी पड़ जाती है ।

जब ऐसी दशा होती है तब दूध नहीं आता । स्तन कड़े बने रहते हैं और कुछ छोटे हो जाते हैं ।