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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

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मृग प्रविशहि नहिं आप मुखमें सोए सिंहके ।

ऐसे उत्तरसे मुझे हर्ष विपाद दोनों प्राप्त हुए । हर्ष तो यों हुआ कि यह एक उत्तेजनापूर्ण उत्तम सम्मति थी और विपाद यों हुआ कि मैंने अपनेको एक परम आलसी समझा । मैं अपने हर्षको लेकर कार्य करनेपर तैयार हुआ । उन्हीं दिनोंमें पूज्यपाद श्री जगन्नाथ प्रसादजी भागवत रईस बनारस कि जिनका मैं प्रीतिपात्र हूँ, आगमन हुआ । कुछ पुराने लेख कि जिनको मैंने पत्रिकाके सम्पादन-कालमें लिखा था और जिनको आपने देखा था, मैं उस समय उन्हीं लेखोंके एकत्र करनेका कार्य कर रहा था । अतएव दो चार दिन बाद श्रीमान् पर मेरा विचार प्रगट हुआ । आपने जिस प्रसन्नताके साथ हर्ष प्रगट कर मेरा साहस बढ़ाया, पाठकोंके लिये उसका अनुमान कराना मेरी सामर्थ्यसे कहीं बाहर है । पाठक एक उत्सुक और लालायित हृदयके लिये इसको कम न समझें । मेरे हृदयमें एका एक यह भाव उत्पन्न हुआ कि ऐसे विषय पर बिना किसी आश्रयके कुछ विचार करना अनुचित है, अतएव यह निश्चय हुआ कि—

महाजनो येन गतस्संपथाः

‘वही मार्ग उत्तम है कि जिससे बड़े-लोग गए हों ।’ अतएव मैंने कुछ ग्रंथोंको देखना प्रारम्भ किया । इन्हीं दिनोंमें आकस्मात् मेरे मित्र परिडित यदुनाथ मिश्र, कि जिनका