संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextगर्भाशयके रोग ।
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४. सरदर्द, चमड़े पर रूखापन, ज़िगर की खराबी और कृत्रियत ।
इस प्रकार गर्भाशय की गर्म सूजन के कारण और लक्षण होते हैं ।
१. गर्भाशय की ठंडी मूज्जन । इस को कई कारण हैं—
१. गर्भाशय में ठंडक का पहुंचना ।
२. ठंडी चीजों का अत्यन्त सेवन ।
३. नाभी के नीचे भारीपन ।
४. रजोधर्म में रुकावट ।
५. ज़िगर का खराब होना ।
६. हिचकी, कृत्रियत और पेटका अफ़रा ।
इस प्रकार गर्भाशय की ठंडी सूजन के कारण और लक्षण होते हैं ।
३. गर्भाशय में वाठी की कड़ी मूज्जन— इसको कई कारण हैं—
१. गर्भाशय की गर्म सूजन से कड़ी सूजन होजाना ।
२. रजविकार से एकाएक सूजन हो जाना ।
पेसी सूजन में अनेक लक्षण होते हैं ।
१. पेट्ट के सामने वोभ सा जान पड़ना ।
२. चलने फिरने में पीड़ा ।
३. निर्बलता और साँस का जल्दी जल्दी चलना ।
४. घबराहट और हाथ पैरों में दर्द ।
५. चलते समय में जिस ओर सूजन हो उस ओर के पैर का कँपना । यदि दोनों ओर सूजन हो तो दोनों पैरों का कँपना ।
६. मवाद पड़ जाने पर ज्वर का होना ।
७. यदि सूजन दहिने ओर है तो गर्भाशय दाएँ ओरको