BharatKosha
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव

Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)

Devanagarihipublished302 pages

Page 6 of 302

Read in context
Page 6

[ ३ ]

निवासस्थान गोरखपुर जिलेके किसी ग्राममें था, आए। उनपर, मैंने अपने विचार प्रगट किये। उन्होंने अत्यन्त प्रसन्नताके साथ कई ग्रंथ देनेके वचन दिये। कुछ ही दिन बाद उक्त पण्डितजी अयोध्या जाते हुए लौटे और अपने साथ शरीर-कल्पद्रुम और रतिशास्त्र लाए। इन दोनों पुस्तकोंको देखकर मैं अत्यन्त प्रसन्न हुआ और पण्डितजीसे एक मासतक इन पुस्तकोंको मेरे पास रखनेकी प्रार्थना की। परन्तु मेरे मित्रने इस बातको स्वीकार न किया, इसलिये कि ये पुस्तकें छपी नहीं थीं और गायद मैं इनको नकल कर लूँ और फिर छपवाऊँ। पण्डितजी मेरे इतने कहने पर चौकने हो गये। अतएव अपनी उपस्थितिमें पुस्तकें मुझे देखनेके लिये देते और चलते समय ले जाया करते थे। इसी प्रकार चार दिन दो दो तीन तीन घण्टे मैं उन पुस्तकोंको देख सका और जो कुछ अपने विषयकी बात पाई नोट कर ली। कुछ ही दिन बाद पण्डितजीका देहान्त हो गया। न जाने पुस्तकें कहाँ हैं; क्योंकि पण्डितजी घरके अकेले ही थे।

दूसरे ग्रंथोंका देखना भी जारी रहा। कुछ दूसरे काव्योंके रहनेसे समय अधिक व्यतीत हुआ। विशेषतः इस कारण कि मेरे जीवनमें इस प्रकारका यह पहला ही कार्य था। सच है, एक नए मनुष्यके लिये सरल कार्य भी प्रारम्भमें कठिन हो जाता है। लिखनेका कार्य प्रारंभ हुआ, परन्तु अनेक शंकाओंके उपस्थित होते हुए बीच बीचमें कई बार रुक जाना पड़ा और