संतति शास्त्र
Santati Shastra
by पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव
Source: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (origin)
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Read in contextगर्भाशयके रोग ।
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११. गर्भाशयके मुखका बन्द हो जाना ।
इसके अनेक कारण हैं ।
१. गर्भाशयके मुखपर चोट लगनेसे उसमें सूजन आ जाती है । इस कारण दोनों किनारे चिपट जाते हैं और सूजन हलकी पड़ कर मुख मोटा पड़ जाता है तथा चिपका रहता है ।
२. गर्भाशयके मुखके दोनों किनारोंमें सवाद पड़कर आपसमें चिपट जानेसे ।
३. गर्भाशयके मुखपर चोट लगनेसे, जब कि सूजन आ जाने पेसी दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।
१. पेड़का भारीपन और उसमें पीड़ा ।
२. हाथ, पाँच, पीठ और साथैलामें दर्द ।
३. गर्भाशयमें सफेद, चिकना और बहनेवाला पदार्थ भरा रहता जब कि गर्भाशयका मुख जन्मसे बन्द न हो ।
गर्भाशयका मुख दो प्रकारसे बन्द होता है । एक तो वह कि जो जन्मसे ही बन्द हो, दूसरा वह जो किसी रोग के होनेसे बन्द हो । जब रोगसे बन्द होता है तब गर्भाशयके मुखके आगे एक परदासा पड़ जाता है । पेसी दशामें रज नहीं निकलता ज्यों ज्यों रोग बढ़ता जाता है, कष्ट भी उसीके साथ बढ़ता जाता है । अधिक रज इकट्ठा हो जानेपर जरा जरासा गिरता है ।
१२. गर्भाशयका अर्बुद ।
इसके कई कारण हैं ।
१. जन्महीसे होना ।
२. जिस जगहसे गर्भाशय मुड़ जाना है वहाँ दवाब पड़नेके कारण पोषण न होनेसे ।