सेहत संजीवनी

सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
by सतगुरु मधु परमहंस जी
Source: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (origin)
DevanagariHindipublished104 pages
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साहिब बन्दगी
को गलाकर उसमें डालें। ढाई दिन तक उसे अच्छी तरह कूटपीस लें। अब मुलतानी मिट्टी से किसी काँच की शीशी को 6 कपड़िमिट्टी कर लें यानी 6 पर्तें मिट्टी की चढ़ा लें। अब उस शीशी को सुखा लें। बाद में शीशी में ऊपर की दवा डालें। कोयला जलाएँ और उसमें उस शीशी को रखें। शीशी का मुख खुला रहना चाहिए। बीच-बीच में 12-13 मिनट में शीशी को किसी चीज से हिलाते रहें। अलग-अलग रंग का धुआँ निकलेगा। फिर उस आग को बुझा दें। जब शीशी ठंडी हो जाए तो उसमें से रस निकाल लें। यह संजीवनी रस है। सभी रोगों पर दें।
वंगरस ( नपुंसकता... )
- □ 60 ग्राम शुद्ध राँगा लेकर आग पर रखें। पीपल और अमली के छाल दोनों का चूर्ण करके पहले से ही रख लें और फिर राँगा में वो चूर्ण डालते जाएँ। 45 मिनट तक राँगा को जलाकर भस्म करें। वंगरस तैयार हो जायेगा।
- □ नपुंसकता के लिए बढ़िया दवा है।
वसंतराज रस ( श्वास, खाँसी... )
- □ त्रिफला, कपूर, कुटकी, इलायची, हर्र, त्रिकुटा, लोहारस, जायफल, चिरायता, लौंग-सबको कूटपीस कर छान लें। फिर सहजने के रस में 10 घण्टे घोंटें।
- □ श्वास रोग को दूर करता है।
- □ खाँसी का भी नाश करता है।
ॐ ॐ ॐ