सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
by सतगुरु मधु परमहंस जी
Source: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (origin)
Page 104 of 104
Read in context104
साहिब बन्दगी
33. मैं कहता हूँ आँखिन देखी 34. गुरु संजीवन नाम बतावे 35. नाम बिना नर भटक मरे 36. रोगों की पहचान 37. यह संसार काल को देशा 38. न्यारी भक्ति 39. साहिब तेरी साहिबी सब घट रही समय 40. जाप मरे अजपा मरे अनहद भी मर जाए 41. आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में 42. सुरति समानी नाम में 43. सबकी गठरी लाल है, कोई नहीं कंगाल 44. निराले सदगुरु 45. कुँजड़ों की हाट में हीरे का क्या मोल
46. जीवड़ा तू तो अमर लोक का पड़ा काल बस आई हो 47. मुझे है काम 'सदगुरु से जगत रुठे तो रुठन दे' 48. जेहि खोजत कल्पों भये घटहि माहिं सो मूर 49. आत्म ज्ञान बिना नर भटके 50. बिन सतगुरु बाँचे नहीं कोटिन करे उपाय 51. अँधी सुरति नाम बिन जानो 52. ये सब साहिब तुम्हीं कीना 53. सत्यनाम निज औषधि सदगुरु दर्द बताय 54. सेहत संजीवनी
साहिब
बन्दगी
सन्त आश्रम रॉजड़ी, पोस्ट राया, ज़िला साम्बा (जे. एण्ड के.)