शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
by लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम
Source: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (origin)
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Read in contextएकोनविंश पटल ] [ ४६७ रूपे साध्यनरस्य जप्तपवनं त्रिस्वादुना भर्ज्य त- त्खादेत् तस्य वेश प्रयाति नियति साध्यः सदा दासवत् ।८१ कामं लिखेत्साध्ययुतं सरोजे स्वरोल्लसत् केसरवर्गपत्रे । उदीरित मन्मथयन्त्रमेतत्सौभाग्यलक्ष्मीविजयप्रदायि ।८२ काश्मीररोचना लाक्षा मृगेममदचन्दनैः । विलिखेत् हेमलेखन्या यन्त्राण्येतानि देशिकः ।८३ शशांक के मध्य में गण में बाण में नाम लिखे जो टान्त हो और बाहिर भूपुर के आगे हों । वृत्त से आवृत्त यह मन्त्र कहा गया है । यह सकल प्रकार की आर्तिकी शान्तिके लिये और मनुष्यों के वश्य के लिये होता है ।७८। नागलता दल के अन्दर स्वास्तिक से युक्त दहनदेह युगमें साध्य से युक्त माया को लिखना चाहिये । पाश अंकुश से आवृत इस यन्त्र को रात्रि के समय में तपावे । जो मन्त्र का जाप करता हुआ गमन करता हुआ होता है वह स्वयं ही साध्य होता है ।७९। षट्कोण में अपने साध्य के नाम के सहित मध्य में माया को लिखे । साध्य के नाम से युक्त उसके कोणों में विदर्भित शक्ति को लिखना चाहिये । बाहर भूमिपुर कोण मदन सहित ताम्बूल पत्र में करे । इस यन्त्र को खाने वाले की प्रिया रात्रि में चिरकाल तक वश्य हो जाती है ।८०। जो मनुष्य साध्य हो उसकी आकृति पिष्ट बनावे और उसके हृदय में शक्ति को लिखकर वहाँ पर कर्म के सहित साध्य का नाम लिखना चाहिये । उसको शक्ति के चार बीजों से समवेष्टित करे । पुनः श्लोकोक्त चार बीजों से बीत करे । उसको खा लेवे तो साध्य नियत रूपसे उसका दास की भाँति सदा वश्य होता है ।८१। अब दूसरा यन्त्र बतलाया जाता है । सरोज में केसर वर्ग पत्र में स्वरों में उल्लसित साध्यसे युक्त काम को लिखे । यह मन्मथ यन्त्र कहा गया है जो सौभाग्य और लक्ष्मी का प्रदान करने वाला तथा विजय प्रदान करने वाला यन्त्र है ।८२। आचार्य को चाहिये इन यन्त्रों को सुवर्ण की लेखनी से काश्मीर रोचना, लाख, मृग के मद तथा चन्दन से लिखना चाहिये ।८३।